००२६ सरल संस्कृत अनुवाद अभ्यास पाठ ५३१ से ५७०

ओ३म्

531. संस्कृत वाक्याभ्यासः

करवाचतुर्थी निमित्तम् एका भगिनी अनशनं कुर्वती अस्ति।
= करवाचौथ पर एक बहन उपवास कर रही है।

प्रातः केवलं नारिकेलस्य रसं पीतवती।
= सुबह केवल नारियल का जूस पिया।

अधुना पुनः नारिकेलस्य रसं पीतवती।
= अभी फिर से नारियल का जूस पिया।

अधुना सा दूरदर्शनं पश्यति।
= अभी वह टी वी देख रही है।

महिलाभिः सायंकाले किं करणीयं एतद् पश्यति।
= महिलाओं को शाम को क्या करना है यह देख रही है।

सा पतिं वारंवारं दूरवाणीं करोति।
= वह पति को बार बार फोन करती है।

“भवान् कदा आगमिष्यति ?”
= आप कब आएँगे ?

सायं चतुर्वादने सा भोजनं पक्ष्यति ?
= शाम चार बजे वह भोजन बनाएगी।

रात्रौ सा पत्या सह भोजनं करिष्यति।
= रात को वह पति के साथ भोजन करेगी।

सा चन्द्रमसः प्रतीक्षां करिष्यति।
= वह चाँद की प्रतीक्षा करेगी।

ओ३म्

532. संस्कृत वाक्याभ्यासः

शुभकर्मणः शुभं संस्मरणं सर्वदा भवति।
= अच्छे काम की अच्छी यादें रहती हैं।

शुभकर्तारं सर्वे स्मरन्ति।
= अच्छे काम करनेवाले को सभी याद करते हैं।

अद्य मम पितुः जन्मशताब्दी अस्ति।
= आज मेरे पिताजी की जन्मशताब्दी है।

श्रीमन्तः आचार्य रामचन्द्र महाभागाः मम पितृवर्याः सन्ति।
= श्रीमान आचार्य रामचंद्र जी मेरे पिताजी हैं।

तेषां गुरुवर्याः श्रीमन्तः ब्रह्मदत्त जिज्ञासु महाभागाः आसन्।
= उनके गुरुजी श्री ब्रह्मदत्त जिज्ञासु जी थे।

पितुः शिक्षा दीक्षा च लाहौरे अभूत्।
= पिताजी की शिक्षा दीक्षा लाहौर में हुई थी।

गुरोः आज्ञया मम पिता शुद्धियज्ञार्थम् अभ्रमत्।
= गुरु जी की आज्ञा से मेरे पिताजी शुद्धि यज्ञ के लिये घूमे थे।

श्री रामचन्द्राचार्यः बुलन्दशहर , एटा , खुर्जा , अलीगढ़ इत्यादिषु स्थानेषु शुद्धिकार्यम् अकरोत्।
= श्री रामचन्द्र आचार्य जी ने बुलन्दशहर , एटा , खुर्जा , अलीगढ़ इत्यादि स्थानों पर शुद्धि कार्य किया।

ये जनाः विधर्मिणः अभवन् तान् वैदिकं ज्ञानं दत्वा पुनः वैदिकधर्मी निर्मितवान्।
= जो लोग विधर्मी हो गए थे उनको वैदिक ज्ञान देकर पुनः वैदिक धर्मी बनाया था।

अष्टात्रिंशत् उत्तर एकसहस्र एकोनविंशतिःतमे वर्षे हैदराबादसत्याग्रहे सः सक्रियः अभवत्।
= 1938 के वर्ष में वे हैदराबाद सत्याग्रह में सक्रिय हुए।

हैदराबादनिजामः हिन्दूनाम् उपरि अत्याचारं करोति स्म।
= हैदराबाद निजाम हिन्दुओं पर अत्याचार करता था।

अतः अनेके आर्यवीराः सत्याग्रहम् अकुर्वन्।
= इसलिये अनेक आर्यवीरों ने सत्याग्रह किया।

आचार्य रामचन्द्रः लातूरस्य कारागारे , सिकंदराबादस्य कारागारे च कठोरं दण्डम् अवहत्।
= आचार्य रामचन्द्र जी ने लातूर जेल में और सिकंदराबादस्य जेल में कठोर दण्डम् झेला।

स्वातंत्र्यानन्तरं ते आदिपुरम् आगतवन्तः।
= स्वतंत्रता के बाद वे आदिपुर आ गए।

अत्र ते संस्कृतप्राध्यापकाः अभवन्।
= यहाँ वे संस्कृत प्राध्यापक बने।

तेषां छात्राः अधुनापि तान् स्मरन्ति।
= उनके छात्र आज भी उन्हें याद करते हैं।

सात्विकं , श्रेष्ठं , निस्पृहं जनं तु सर्वे स्मरन्ति एव।
= सात्विक श्रेष्ठ निस्पृह व्यक्ति को सभी याद करते ही हैं।

ओ३म्

533. संस्कृत वाक्याभ्यासः

तस्याः गृहे वायुचुल्ली अस्ति।
= उसके घर में गैस का चूल्हा है।

तथापि सा अद्य अग्निचुल्लीं ज्वालितवती।
= फिर भी उसने आज अँगीठी जलाई है।

तस्याः पतिः अपि भोजनपाचने सहयोगं करोति।
= उसका पति भी भोजन पकाने में सहयोग कर रहा है।

सा बर्जरस्य रोटिकाः पचति।
= वह बाजरे की रोटियाँ सेंक रही है।

अग्निचुल्ली उपरि सा मृत्तिकायाः तप्तकं स्थापितवती।
= अँगीठी पर उसने मिट्टी का तवा रखा है।

मृत्तिकातप्तके सा बर्जरस्य रोटिकाः पचति।
= मिट्टी के तवे पर वह बाजरे की रोटियाँ सेंक रही है।

अग्निचुल्ली उपरि एव सा शाकं निर्मितवती।
= अँगीठी पर ही उसने सब्जी बनाई।

सा यदाकदा पायसम् अपि अग्निचुल्ली उपरि निर्माति।
= वह कभी कभी अँगीठी पर खीर भी बनाती है।

मासे एकवारं अग्निचुल्ली प्रज्ज्वाल्यते।
= महीने में एकबार अँगीठी जलाई जाती है।

तस्याः परिवारजनेभ्यः अग्निचुल्याः भोजनं बहु रोचते।
= उसके परिवारजनों को अँगीठी का भोजन बहुत पसंद है

ओ३म्

534. संस्कृत वाक्याभ्यासः

एषः चित्रकारः अस्ति।
= यह चित्रकार है।

एतस्य नाम डोंगा बज्जीबाबु नागेश्वररावः अस्ति।
= इसका नाम डोंगा बज्जीबाबु नागेश्वररावः है।

एषः आन्ध्रप्रदेशीयः अस्ति।
= यह आंध्रप्रदेश का है।

अधुना ममैव नगरे निवसति।
= अभी मेरे ही नगर में रहता है।

एषः मम मित्रम् अस्ति।
= यह मेरा मित्र है।

बहु सुन्दराणि चित्राणि रचयति।
= बहुत सुंदर चित्र रचता है।

एतस्य चित्राणां प्रदर्शनी अपि आयोज्यते।
= इसके चित्रों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाती है।

अधुना एषः मोरोक्को देशं गच्छति।
= अभी यह मोरोक्को देश जा रहा है।

मोरोक्को देशे एतस्य चित्राणां प्रदर्शनं भविष्यति।
= मोरोक्को देश में इसके चित्रों की प्रदर्शनी होगी।

डोंगा बज्जीबाबु भ्रात्रे कोटिशः शुभकामनाः , अभिनन्दनानि च।

ओ३म्

535. संस्कृत वाक्याभ्यासः

सा प्रातः षट्वादने धेनवे तृणं ददाति।
= वह प्रातः छः बजे गाय को घास देती है।

सपाद षट्वादने धेनुं दोग्धि।
= सवा छः बजे गाय दुहती है।

सार्ध षट्वादने सा गोमयेन भूमिं लिम्पति।
= साढ़े छः बजे वह गोबर से भूमि लीपती है।

सा भूमौ रङ्गावलीं करोति।
= वह भूमि पर रंगोली करती है।

अनन्तरं सप्तवादने सा गोदुग्धस्य पायसं पचति।
= बाद में वह सात बजे गाय के दूध की खीर पकाती है।

तस्याः ग्रामे अद्य यज्ञः भवति।
= उसके गाँव में आज यज्ञ हो रहा है।

अष्टवादने सा पायसं यज्ञशालायां नयति।
= वह आठ बजे यज्ञशाला में खीर ले जाती है।

सा यज्ञे पायसस्य आहुतिं ददाति।
= वह यज्ञ में खीर से आहुति देती है।

यज्ञे सा अपि मन्त्रपाठं करोति।
= यज्ञ में वह भी मंत्रपाठ करती है।

शरदपूर्णिमायां सा सर्वेभ्यः पायसं ददाति।
= शरदपूर्णिमा पर वह सबको खीर देती है।

ओ३म्

536. संस्कृत वाक्याभ्यासः

एषा श्रमिणी अस्ति।
= यह श्रमिणी है।

कृषिक्षेत्रे एषा श्रमं करोति।
= यह खेत में श्रम करती है।

सर्वासु ऋतुषु एषा कार्यं करोति।
= सभी ऋतुओं में यह काम करती है।

एषा उटजे निवसति।
= ये झोपड़ी में रहती है।

एतस्याः गृहे अधिकानि साधनानि न सन्ति।
= इसके घर अधिक साधन नहीं हैं।

तथापि एषा कार्यरता भवति।
= फिर भी यह कार्यरत रहती है।

सर्वदा हसति।
= हमेशा हँसती है।

एतस्याः मुखे विषादः न दृश्यते।
= इसके चेहरे पर विषाद नहीं दिखता है।

साधारणानि वस्त्राणि धारयति तथापि प्रसन्ना अस्ति।
= साधारण वस्त्र पहनती है फिर भी प्रसन्न है।

श्रृंगारं विना अपि सुन्दरी दृश्यते।
= श्रृंगार के बिना भी सुंदर दिख रही है।

मृत्तिकायां कार्यं करोति एषा।
= ये मिट्टी में काम करती है।

एषा महिला कदापि चिन्तां न करोति।
= ये महिला कभी भी चिंता नहीं करती है।

ओ३म्

537. संस्कृत वाक्याभ्यासः

सः श्रेष्ठः अभिनेता अस्ति।
= वह श्रेष्ठ अभिनेता है।

सा श्रेष्ठा अभिनेत्री अस्ति।
= वह श्रेष्ठ अभिनेत्री है।

यदा सः/सा हसति तदा दर्शकाः अपि हसन्ति।
= जब वह हँसता/हँसती है तब दर्शक भी हँसते हैं।

यदा सः/सा रोदिति तदा दर्शकाः अपि रुदन्ति
= जब वह रोता/रोती है तब दर्शक भी रोते हैं।

यदा सः/सा कुप्यति तदा दर्शकाः अपि कुप्यन्ति
= जब वह क्रोध करता / करती है तब दर्शक भी क्रोध करते हैं।

अभिनयात् पूर्वं सः/सा अभ्यासं करोति।
= अभिनय से पहले वह अभ्यास करता/करती है।

सः/ सा संवादं स्मरति।
= वह संवाद याद करता / करती है।

रङ्गमञ्चस्य व्यवस्थां सः / सा पश्यति।
= वह रंगमंच की व्यवस्था देखता/ देखती है।

नाटकात् पूर्वं सर्वे अभिनेतारः प्रार्थनां कुर्वन्ति।
= नाटक से पहले सभी अभिनेता प्रार्थना करते हैं।

यवनिका यदा उत्थाप्यते तदा नाटकम् आरभते।
= पर्दा जब उठता है तब नाटक शुरू होता है।

नाटकं दृष्ट्वा प्रेक्षकाः प्रसन्नाः भवन्ति।
= नाटक देखकर प्रेक्षक प्रसन्न होते हैं।

ओ३म्

538. संस्कृत वाक्याभ्यासः

ह्यः विजयादशम्यां सर्वत्र शस्त्रपूजा अभवत्।
= कल विजयादशमी को सब जगह शस्त्रपूजा भी हुई।

ह्यः एव वयं राफेल नामकं युद्धकं विमानं फ्रांसतः प्राप्तवन्तः।
= कल ही हमने राफेल नाम का युद्धक विमान फ्रांस से प्राप्त किया।

अस्माकं रक्षामन्त्री श्रीमन् राजनाथसिंहः प्रथमं राफेलविमानं स्वीकृतवान्।
= हमारे रक्षामंत्री श्री राजनाथसिंह ने पहला राफेल विमान स्वीकार किया।

सः सर्वप्रथमं विमानस्य पूजां कृतवान्।
= उन्होंने सबसे पहले विमान की पूजा की।

सः विमाने ॐ इति लिखितवान्।
= उन्होंने विमान पर ॐ लिखा।

अनन्तरं सः विमानम् आरुह्य उपविष्टवान्।
= बाद में वो विमान पर चढ़कर बैठे।

फ्रांसस्य वायुसेनाधिकारी विमानम् उड्डयितवान्।
= फ्रांस के वायुसेना अधिकारी ने विमान उड़ाया।

ध्वनिवेगेन विमानम् उड्डीतम्।
= ध्वनिवेग से विमान उड़ा।

रक्षामन्त्री राफेलविमानस्य कार्यप्रणाल्या संतुष्टः अभवत्।
= रक्षामंत्री राफेल विमान की कार्यप्रणाली से संतुष्ट हुए।

अधुना राफेलविमानं भारतम् आगामिष्यति।
= अब राफेल विमान भारत आएगा।

भारतस्य वायुसैन्यशक्तिः वर्धिष्यते।
= भारत की वायुसैन्य शक्ति बढ़ जाएगी।

ओ३म्

539. संस्कृत वाक्याभ्यासः

अद्य विजयादशमी अस्ति।
= आज विजयादशमी है।

सर्वत्र रावणस्य पुत्तलं दह्यते
= सब जगह रावण के पुतले जलाए जाएँगे।

न जाने कति वर्षाणि अभवन् ….
= न जाने कितने वर्ष हो गए ….

वयं प्रतिवर्षं रावणस्य पुत्तलं दहामः।
= हम प्रतिवर्ष रावण का पुतला जलाते हैं।

तथापि रावणः जीवितः भवति।
= फिर भी रावण जीवित हो जाता है।

समाजे या काsपि कुप्रथा अस्ति सा समापनीया।
= समाज में जो भी कुप्रथा है उसे समाप्त करना चाहिये।

स्वजीवने यत्किमपि विकारः अस्ति तदपि समापनीयम्।
= अपने जीवन में जो भी विकार है उसे दूर करना चाहिये।

पुत्तलदहनेन किमपि न भविष्यति।
= पुतला जलाने से कुछ भी नहीं होगा।

विजयादशम्यां वयं श्रेष्ठानि पुस्तकानि पठामः चेत् वरम्।
= विजयादशमी पर अच्छी पुस्तकें पढ़ें तो अच्छा।

राष्ट्रस्य सेवां कुर्मः चेत् बहु योग्यम्।
= राष्ट्र की सेवा करें तो बहुत अच्छा।

राष्ट्रे सर्वत्र स्वच्छता भवेत्।
= राष्ट्र में सब जगह स्वच्छता हो।

सर्वे स्वस्थाः भवन्तु।

सर्वे श्रेष्ठाः भवन्तु।

विजयादशमीपर्वणः सर्वेभ्यः कोटिशः मङ्गलकामनाः।

ओ३म्

540. संस्कृत वाक्याभ्यासः

अद्य स्मितायाः गृहे यज्ञं कारितवान्।
= आज स्मिता के घर यज्ञ कराया।

यज्ञार्थं स्मिता घृतम् आनीतवती।
= यज्ञ के लिये स्मिता घी लाई।

घृतस्य सुगन्धिः काचित् भिन्ना आसीत्।
= घी की सुगंध कुछ भिन्न थी।

अहं तां पृष्टवान् ।
= मैंने उससे पूछा।

घृतं कुतः आनीतवती ?
= घी कहाँ से लाईं ?

सा अवदत् – अहं गृहे एव घृतं निर्मामि।
= वह बोली – मैं घर में ही घी बनाती हूँ।

मम गृहे दुग्धं गोशालातः आगच्छति।
= मेरे घर दूध गौशाला से आता है।

आपणस्य घृतं मह्यं न रोचते।
= बाजार का घी मुझे पसंद नहीं है।

तस्याः गृहे यज्ञः बहु प्रेम्णा अभवत्।
= उसके घर बहुत प्रेम से हवन हुआ।

ओ३म्

541. संस्कृत वाक्याभ्यासः

सा चलभाषस्य कूटाङ्कं विस्मृतवती।
= वह मोबाइल का पासवर्ड भूल गई।

चलभाषं संचालयितुं न शक्नोति सा ।
= वह मोबाइल ऑपरेट नहीं कर पा रही है।

मात्रा सह वार्तां कर्तुम् इच्छति सा।
= वह माँ के साथ बात करना चाहती है।

सा अनेकवारं प्रयत्नं कृतवती।
= उसने अनेक बार प्रयत्न किया।

जनाः चलभाषे कूटाङ्कं योजयन्ति।
= लोग मोबाइल में संख्या का पासवर्ड रखते हैं।

जनाः चलभाषे कूटाकृतिं योजयन्ति।
= लोग मोबाइल में आकृति वाला पासवर्ड रखते हैं।

सर्वेषां भिन्ना भिन्ना आकृतिः भवति।
= सबकी भिन्न भिन्न आकृति होती है।

अन्यः कोsपि जनः रक्षिताकृतिं विहाय किमपि आकृतिं रचयति तदा चलभाषः कार्यं न करोति।
= अन्य कोई भी व्यक्ति रक्षित आकृति के सिवाय कोई भी आकृति रचता तो मोबाइल काम नहीं करता है।

व्यक्तिगतं विवरणं सुरक्षितं भवेत् तदर्थं कूटाकृतिं वा कूटाक्षरं योजयन्तु।
= व्यक्तिगत विवरण सुरक्षित रहे इसके लिये आकृति या संख्या का पासवर्ड रखिये।

कूटाक्षरं मा विस्मरन्तु।
= पासवर्ड मत भूलिये।

ओ३म्

542. संस्कृत वाक्याभ्यासः

रेलस्थानके जनाः प्रतीक्षां कुर्वन्तः सन्ति।
= रेलवे स्टेशन में लोग प्रतीक्षा कर रहे हैं।

रेलयानम् आगामिष्यति।
= रेलगाड़ी आएगी।

केचन जनाः घटीं पश्यन्ति।
= कुछ लोग घड़ी देख रहे हैं।

केचन जनाः यानपेटिकां कर्षयन्ति।
= कुछ लोग सूटकेस खींच रहे हैं।

केचन जनाः परिजनम् आप्रष्टुम् आगतवन्तः सन्ति।
= कुछ लोग संबंधी को छोड़ने आए हैं।

यात्रिणः यात्राचिटिकां स्वीकुर्वन्ति।
= यात्री टिकट लेते हैं।

आगन्तुकाः अपि स्थानकचीटिकां कृणन्ति ।
= मुलाकाती लोग प्लेटफॉर्म टिकट खरीदते हैं।

रेलस्थानके कुत्रापि अस्वच्छता नास्ति।
= रेलवे स्टेशन में कहीं भी अस्वच्छता नहीं है।

रेलयानं यदा आगच्छति तदा सर्वे रेलरथं प्रति धावन्ति।
= रेलगाड़ी जब आती है तब सभी रेल के डिब्बे की ओर दौड़ते हैं।

बालकाः रेलयानं दृष्ट्वा प्रसन्नाः भवन्ति।
= बालक रेलगाड़ी देखकर खुश होते हैं।

रेलयानम् अधुना चलिष्यति।
= रेल अभी चलेगी।

अनन्तरं रेलस्थानकं रिक्तं भविष्यति।
= बाद में रेलवे स्टेशन खाली हो जाएगा।

ओ३म्

543. संस्कृत वाक्याभ्यासः

अद्य एकं पर्वतम् आरूढवान्।
= आज एक पर्वत पर चढ़ा।

पर्वते एकं मन्दिरम् अस्ति।
= पर्वत पर एक मंदिर है।

सर्वे पर्वतम् आरोहन्ति।
= सब पर्वत पर चढ़ते हैं।

पर्वते सोपनानि सन्ति।
= पर्वत पर सीढियाँ हैं।

अहं सोपानैः आरूढवान्।
= मैं सीढ़ियों से चढ़ा।

यदा पर्वतस्य उपरि प्राप्तवान् तदा अहं ताम्यामि स्म।
= जब मैं पर्वत पर पहुँचा तब मैं हाँफ रहा था।

ये ये पर्वतम् आरोहन्ति ते ताम्यन्ति।
= जो जो पर्वत पर चढ़ते हैं वे हाँफते हैं।

नेत्रे निमील्य अहम् उपविष्टवान्।
= दोनों आँखे बंद करके मैं बैठ गया।

अर्धहोरा अनन्तरम् अहं शान्तः अभवम्।
= आधे घंटे बाद मैं शान्त हुआ।

अनन्तरं शनैः शनैः अहम् अधः आगतवान्।
= बाद में धीरे धीरे नीचे आया।

( एतद् पाठं मध्याह्ने लिखितवान् आसम्। अधुना प्रेषयामि।
= यह पाठ दोपहर में लिख दिया था अब भेज रहा हूँ। )

ओ३म्

545. संस्कृत वाक्याभ्यासः

लालबहादुर शास्त्री महाभागः अस्माकं द्वितीयः प्रधानमन्त्री आसीत्।
= लालबहादुर शास्त्री महोदय हमारे द्वितीयः प्रधानमन्त्री थे।

सः द्वितीयः न अपितु अद्वितीयः आसीत्।
= वे द्वितीय नहीं बल्कि अद्वितीय थे।

धनस्य अभावः अपि सन् सः उच्चशिक्षां प्राप्तवान्।
= धन का अभाव होते हुए भी उन्होंने उच्च शिक्षा पाई।

संस्कृतविषये शास्त्री पदवीं काशीविश्वविद्यालयतः प्राप्तवान्।
= संस्कृत विषय में शास्त्री पदवी काशीविश्वविद्यालय से पाई।

सः स्वाधीनतान्दोलने अपि सक्रियः आसीत्।
= वे स्वधीनता आंदोलन में भी सक्रिय रहे।

प्रथमः प्रधानमंत्री यदा दिवंगतः जातः तदा लालबहादुर शास्त्री देशस्य द्वितीयः प्रधानमन्त्री रूपेण चितः।
= पहले प्रधानमंत्री जब दिवंगत हो गए तब लालबहादुर शास्त्री जी दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में चुने गए।

तस्य शासनकाले भारते अन्नाभावः आसीत्।
= उनके शासनकाल में भारत में अन्न का अभाव था।

अतएव सः एकवारम् अन्नं खादति स्म।
= इसलिये वे एकबार अन्न खाते थे।

सः अतीव सात्विकः जनः आसीत्।
= वो अति सात्विक जन थे।

तथापि सः राष्टरक्षार्थं सर्वदा तत्परः भवति स्म।
= फिर भी वे राष्ट्ररक्षा के लिये हमेशा तत्पर रहते थे।

पाकिस्थानेन यदा आक्रमणः कृतः तदा लालबहादुर शास्त्रिणा बलेन प्रतिकारस्य निर्णयः कृतः।
= पाकिस्तान ने जब आक्रमण किया तब लालबहादुर शास्त्री जी ने बल से सामना करने का निर्णय किया।

अस्माकं सैनिकाः स्वं पराक्रमं प्रदर्शितवन्तः।
= हमारे सैनिकों ने अपना पराक्रम दिखाया।

अन्ततोगत्वा पाकिस्थानस्य पराजयः अभवत्।
= अंत में पाकिस्तान की पराजय हुई।

अहो दुःखम् ! अस्माकं लोकप्रियः प्रधानमन्त्री छलेन सूदितः।
= ओह दुख है , हमारे लोकप्रिय प्रधानमंत्री को छल से मार दिया गया।

अद्य लालबहादुरशास्त्री महाभागस्य जन्मजयन्ति अस्ति।
= आज लालबहादुर शास्त्री जी की जन्म जयन्ति है।

कोटि कोटि वन्दनानि।

ओ३म्

546. संस्कृत वाक्याभ्यासः

सुरवरः नापितः अस्ति।
= सुरवर नाई है।

सः प्रातः अष्टवादने स्वम् आपणम् आगच्छति।
= वह सुबह आठ बजे अपनी दुकान आ जाता है।

सुरवरः सर्वप्रथमम् आपणं सम्मार्जयति।
= सुरवर पहले दूकान साफ करता है।

अनन्तरं सः दीपं प्रज्ज्वालयति।
= बाद में वह दीप जलाता है।

सः गायत्रीमन्त्रं जानाति।
= वह गायत्री मंत्र जानता है।

गायत्रीमंत्रोच्चारणस्य अनन्तरं सः एकं भजनम् अपि गायति।
= गायत्री मंत्र के उच्चारण के बाद वह एक भजन गाता है।

गायन् गायन् सः साधनानि प्रक्षालयति।
= गाते गाते वह साधनों को साफ करता है।

तावद् कोsपि ग्राहकः आगच्छति।
= तब तक कोई ग्राहक आ जाता है।

सुरवरः ग्राहकस्य केशान् कर्तयति।
= सुरवर ग्राहक के बाल काटता है।

ग्राहकाः सुरवरस्य मधुरेण स्वभावेन मुदिताः भवन्ति।
= ग्राहक सुरवर के मीठे स्वभाव से खुश होते हैं।

ओ३म्

547. संस्कृत वाक्याभ्यासः

* पुनः पाठयतु।
= फिर से पढ़ाइये।

** किमर्थं पुनः ?
= फिर से क्यों ?

* केचन जनाः अनुपस्थिताः आसन्।
= कुछ लोग अनुपस्थित थे।

* केचन जनाः नूतनाः सन्ति।
= कुछ लोग नए हैं।

** सर्वे अभ्यासं कुर्वन्ति खलु ?
= सभी अभ्यास करते हैं न ?

* आं कुर्वन्ति।
= हाँ करते हैं।

** सर्वेषाम् अभ्यासः न दृश्यते।
= सबका अभ्यास नहीं दिखता है।

* सर्वे केवलं पठन्ति।
= सब केवल पढ़ते हैं।

** केवलं पठनेन संस्कृतं न शिक्ष्यते।
= केवल पढ़ने से संस्कृत नहीं सीखी जाती है।

** अभ्यासः अपि आवश्यकः भवति।
= अभ्यास भी आवश्यक होता है।

ओ३म्

548. संस्कृत वाक्याभ्यासः

भोः मित्र ! अत्र अवकरं मा क्षिप ।
= ओ मित्र ! यहाँ कूड़ा मत फेंको।

यथा अस्ति तव गृहं स्वच्छम्
= जैसे तुम्हारा घर स्वच्छ है।

तथैव भवेत् मम गृहं स्वच्छम्
= वैसे ही हो स्वच्छ घर मेरा।

पश्य , तत्र अस्ति अवकरपात्रम् ।
= देखो , वहाँ है कूड़ेदान ।

नगरपालिकायाः अस्ति अवकरपात्रम् ।
= नगरपालिका का है कूड़ेदान।

वीथिः अस्ति सर्वेषाम् ।
= गली तो सबकी है।

मा कुरु, मा कुरु मार्गम् अस्वच्छम्।
= मत करो , मत करो रास्ते को अस्वच्छ।

स्वच्छतायां नास्ति किमपि कष्टम्।
= स्वच्छता में कोई कष्ट नहीं है।

उत्थापय तव सर्वम् अवकरम्।
= उठा लो सारा कूड़ा तुम्हारा।

नय , नय इतः सर्वम् अवकरम्।
= ले जाओ यहाँ से सारा कूड़ा।

क्षिप क्षिप अवकरपात्रे अवकरम्।
= फेंको कूड़ेदान में कूड़ा।

ओ३म्

549. संस्कृत वाक्याभ्यासः

अद्य केशवः अनुपस्थितः आसीत्।
= आज केशव अनुपस्थित था।

किमर्थम् ?
= क्यों ?

अद्य केशवस्य मातुः स्वास्थ्यं सम्यक् नास्ति।
= आज केशव की माता जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है।

केशवः मातरं चिकित्सालयं नीतवान्।
= केशव माँ को चिकित्सालय ले गया था।

केशवः श्वः अपि न आगमिष्यति।
= केशव कल भी नहीं आएगा।

अद्य विशाखा अनुपस्थिता आसीत्।
= आज विशाखा अनुपस्थित थी।

किमर्थम् ? = क्यों / किसलिये ?

विशाखायाः भ्राता विदेशतः आगतवान् अस्ति।
= विशाखा का भाई विदेश से आया है।

विशाखा भ्रातुः स्वागतार्थं गृहे अस्ति।
= विशाखा भाई का स्वागत करने के लिये घर में है।

विशाखा परश्वः आगमिष्यति।
= विशाखा परसों आएगी।

ओ३म्

550. संस्कृत वाक्याभ्यासः

अधुना अमेरिकायाः ह्यूस्टन नगरे अस्मि।
= अभी अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में हूँ।

भवान् / भवती कुत्र अस्ति ?
= आप कहाँ हैं ?

सर्वेषाम् उत्तरम् – अहमपि ह्यूस्टन नगरे अस्मि।
= सबका उत्तर – मैं भी ह्यूस्टन शहर में हूँ।

कथम् ? = कैसे ?

अहं दूरदर्शनेन अमेरिकायां चलमानं कार्यक्रमं पश्यामि।
= मैं दूरदर्शन द्वारा अमेरिका में चल रहे कार्यक्रम को देख रहा हूँ।

गुजरातस्य गरबा नृत्यं दृष्टवान्।
= गुजरात का गरबा देखा।

पंजाबस्य भाँगड़ा नृत्यं दृष्टवान्।
= पंजाब का भाँगड़ा देखा।

ओड़िसी नृत्यं दृष्टवान्।
= ओड़िसी नृत्य भी देखा।

शास्त्रीयं सङ्गीतं श्रुतवान्।
= शास्त्रीय संगीत सुना।

भारतीयपाश्चात्यसङ्करं नृत्यं दृष्टवान्।
= भारतीय पाश्चात्य मिलाजुला नृत्य देखा।

सर्वे भारतीयाः नरेन्द्र मोदी महोदयस्य प्रतीक्षां कुर्वन्तः सन्ति।
= सभी भारतीय नरेंद्र मोदी जी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

अहं सम्पूर्णं कार्यक्रमं द्राक्ष्यामि।
= मैं पूरा कार्यक्रम देखूँगा।

ओ३म्

551. संस्कृत वाक्याभ्यासः

पञ्च वर्षेभ्यः पूर्वं सः वृत्तिम् अलभत।
= पाँच वर्ष पहले उसने नौकरी पाई।

सः गृहनगरे वृत्तिं न अलभत।
= उसने गृहनगर में नौकरी नहीं पाई।

सः अन्यस्मिन् नगरे वृत्तिम् अलभत।
= उसने अन्य नगर में नौकरी पाई।

सः मासे एकवारं गृहम् आगच्छति।
= वो महीने में एक बार घर आता है।

तस्य अनुजा तं बहु स्मरति।
= उसकी छोटी बहन उसे बहुत याद करती है।

सा प्रतिदिनं तं दूरवाणीं करोति।
= वो प्रतिदिन उसे फोन करती है।

यदा भ्राता गृहम् आगच्छति तदा सा चित्रकलां दर्शयति।
= जब भैया घर आते हैं तब वह चित्रकला दिखाती है।

सा चित्रकलायां निपुणा अस्ति।
= वह चित्रकला में निपुण है।

अधुना तस्य स्थानांतरणं भविष्यति।
= अब उसका ट्रान्सफर होगा।

तस्य माता अपि स्थानान्तरणस्य प्रतीक्षां करोति।
= उसकी माँ भी उसके ट्रांसफर की प्रतीक्षा कर रही है।

तस्य अनुजा प्रतिदिनं प्रार्थनां करोति।
= उसकी छोटी बहन प्रतिदिन प्रार्थना करती है।

अनुजायाः प्रार्थना सफला भवेत्।
= छोटी बहन की प्रार्थना सफल हो।

ओ३म्

552. संस्कृत वाक्याभ्यासः

पत्नी – एतद् अपि क्षिपतु ।
= ये भी फेंक दीजिये

पतिः – अद्य पुनः ….
=आज फिर से ….

पत्नी – आम् , अद्य आवश्यकानि पत्राणि क्षेपणीयानि सन्ति।
= हाँ , आज अनावश्यक पत्र फेंकने हैं


पतिः – कुत्र क्षिपाणि ? नगरपालिकायाः अवकरपात्रे खलु ?
= कहाँ फेंकूँ , नगरपालिका के कूड़ेदान में क्या ?

पत्नी – नैव , समुद्रे क्षिपतु ।
= नहीं , समुद्र में फेंकिये।

पतिः – किमर्थं समुद्रे ???
= समुद्र में क्यों ???

पत्नी – एतद् अवकरः नास्ति।
= ये कूड़ा नहीं है।

– सर्वेषां निमंत्रणपत्रिकाः सन्ति।
= सबकी निमंत्रणपत्रिकाएँ हैं।

सर्वे प्रेम्णा आहूतवन्तः ।
= सबने प्रेम से बुलाया था।

पतिः – एवं वा ? , अहं समुद्रे क्षिप्स्यामि।
= ऐसा क्या ? मैं समुद्र में फेंक दूँगा।

अहं समुद्रं प्रति गच्छामि।
= मैं समुद्र की ओर जाता हूँ।

ओ३म्

553. संस्कृत वाक्याभ्यासः

बदलूरामस्य नाम भवन्तः न श्रुतवन्तः स्युः।
= बदलूराम का नाम आपने नहीं सुना होगा।

द्वितीयविश्वयुद्धे असमसैन्यदलस्य सैनिकाः ब्रिटिश पक्षतः युद्धयन्ते स्म।
= द्वितीय विश्वयुद्ध में असम रेजिमेंट के सैनिक ब्रिटिश की तरफ से लड़ रहे थे।

जापानस्य सैनिकैः सह युद्धं कुर्वन्तः आसन्।
= जापान के सैनिकों के साथ युद्ध कर रहे थे।

तस्मिन् युद्धे बदलूराम नामकः एकः सैनिकः वीरगतिं प्राप्तवान्।
= उस युद्ध में बदलूराम नाम का एक सैनिक वीरगति को प्राप्त हुआ।

बदलूरामस्य शवं ते भूम्याः अधः निखनितवन्तः।
= बदलूराम का शव उन्होंने भूमि के नीचे दफना दिया।

तथापि ते बदलूरामस्य नाम आवलितः न निष्कासितवन्तः।
= फिर भी उन्होंने बदलूराम का नाम सूचि से नहीं निकाला।

अतएव ब्रिटिशसैनिकाः बदलूरामस्य कृते अपि अन्नं प्रेषयन्ति स्म।
= अतः ब्रिटिश सैनिक बदलूराम के लिये भी राशन भेजते थे।

जापानेन सह युद्धम् अवर्धत।
= जापान के साथ युद्ध बढ़ गया।

अतः अन्नस्य आपूर्तिः न भवति स्म।
= अतः अन्न की आपूर्ति नहीं हो रही थी।

अतएव असमसैनिकाः बदलूरामस्य अन्नं खादित्वा युद्धं कृतवन्तः।
= अतः असम सैनिकों ने बदलूराम का राशन खा कर युद्ध किया।

जापानस्य पराजयः अभवत्।
= जापान की पराजय हुई।

यदा ब्रिटिश जनाः तान् पृष्टवन्तः – ” कुतः अन्नं लभन्ते स्म?”
= जब ब्रिटीशरों ने उनसे पूछा – ” कहाँ से अन्न पाते थे ?

तदा ते सर्वे बदलूरामस्य नाम उक्तवन्तः।
= तब उन सबने बदलूराम का नाम लिया।

बदलूरामस्य सम्पूर्णां वार्ताम् उक्तवन्तः।
= बदलूराम की सारी कहानी कही।

अधुना असमसैनिकानां प्रयाणगीतं बदलूरामस्य नाम्ना अस्ति।
= अब असम सैनिकों का प्रयाणगीत बदलूराम के नाम पर है।

“बदलूरामस्य देहः भूम्याः अधः अस्ति।
वयं तस्मात् कारणात् भोजनं प्राप्नुमः।”
= बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है .. हम उसके कारण भोजन को पाते हैं।

तद् गीतं भवन्तः अपि श्रृण्वन्तु।
= वो गीत आप भी सुनिये।

ओ३म्

554. संस्कृत वाक्याभ्यासः

अधुना = અત્યારે , अभी

गच्छामि = જાઉં છું जाता हूँ

अधुना अहं नागपुरं गच्छामि।
અત્યારે હું નાગપુર જાઉં છું
अभी मैं नागपुर जाता हूँ / जा रहा हूँ।

अधुना अहं भुजं गच्छामि।
અત્યારે હું ભુજ જાઉં છું
अभी मैं भुजं जाता हूँ / जा रहा हूँ।

अधुना अहं मन्दिरं गच्छामि।
અત્યારે હું મંદિર જાઉં છું
अभी मैं मंदिर जाता हूँ / जा रहा हूँ।

अधुना अहं विद्यालयं गच्छामि।
અત્યારે હું વિદ્યાલય જાઉં છું
अभी मैं विद्यालय जाता हूँ / जा रहा हूँ।

अधुना अहं उद्यानं गच्छामि।
અત્યારે હું બગીચા માં જાઉં છું
अभी मैं बगीचे में जाता हूँ / जा रहा हूँ।

अधुना अहं काशीं गच्छामि।
અત્યારે હું કાશી જાઉં છું
अभी मैं काशी जाता हूँ / जा रहा हूँ।

अधुना अहं बद्रीनाथं गच्छामि।
અત્યારે હું બદરીનાથ જાઉં છું
अभी मैं बद्रीनाथ जाता हूँ / जा रहा हूँ।

अधुना अहं न गच्छामि।
હવે હું નથી જતો.
अब मैं नहीं जाता हूँ / जा रहा हूँ।

अधुना अहं गृहं गच्छामि।
હવે હું ઘરે જાઉં છું
अब मैं घर जाता हूँ / जा रहा हूँ।

રવિવાર નો લાભ લઈએ , સંસ્કૃત વાક્યો નો અભ્યાસ કરીયે.
रविवार को और कुछ नहीं इतना तो बोलने का अभ्यास करें

ओ३म्

555. संस्कृत वाक्याभ्यासः

सरोवरे सिंहः जलं पिबति।
= सरोवर में शेर पानी पीता है।

सिंहः लपलप कृत्वा जलं पिबति।
= शेर लपलप करके पानी पीता है।

सिंहः जिह्वया जलं पिबति।
= शेर जीभ से पानी पीता है।

जिह्वां मुखात् बहिः निष्कासयति।
= जीभ को मुँह से बाहर निकालता है।

जिह्वायां जलं गृह्णाति।
= जीभ में पानी लेता है।

यदा जिह्वा मुखस्य अन्तः गच्छति तदा जलमपि मुखस्य अन्तः गच्छति।
= जब जीभ मुँह के अंदर जाती है तब पानी भी मुँह के अंदर जाता है।

जलपानसमये सिंहः अत्र तत्र पश्यति।
= पानी पीते समय शेर यहाँ वहाँ देखता है।

सिंहेन सह तस्य शावकाः अपि सन्ति।
= शेर के साथ उसके बच्चे भी हैं।

सिंहिनी अपि जलम् पातुम् आगच्छति।
= शेरनी भी पानी पीने आती है।

जलं पीत्वा ते वनं प्रति गच्छन्ति।
= पानी पीकर वे वन को जाते हैं।

ओ३म्

556. संस्कृत वाक्याभ्यासः

सर्वे वाहनस्वामिनः भयभीताः सन्ति।
= सभी वाहन मालिक भयभीत हैं
१) मम पार्श्वे यानचालनस्य अनुज्ञप्तिः नास्ति
मेरे पास वाहन चलाने का लाइसेंस नहीं है
२) मम पार्श्वे यानस्य पंजीकरण पुस्तकं नास्ति।
मेरे पास वाहन की आर सी बुक नहीं है
३) मम यानस्य प्रदूषण परीक्षणपत्रं नास्ति।
मेरे पास पॉल्यूशन जाँच पत्र नहीं है
४) मम यानस्य बीमा नास्ति।
मेरे वाहन का बीमा नहीं है।
५) मम पार्श्वे शिरस्त्राणं नास्ति।
= मेरे पास हेलमेट नहीं है

ओह , सर्वे अधुना धावन्ति
= ओह , अभी सब दौड़ रहे हैं

ओ३म्

557. संस्कृत वाक्याभ्यासः

चन्द्रयानम् इतः कदा गतम् ?
= चन्द्रयान यहाँ से कब गया ?

द्वाभ्यां मासाभ्यां पूर्वं गतम् ।
= दो महिने पहले गया ।

कुतः गतम् ?
= कहाँ से गया ?

गतं न अपितु प्रेषितम् ।
= गया नहीं अपितु भेजा गया।

कुतः प्रेषितम् ?
= कहाँ से भेजा गया ?

श्रीहरिकोटातः प्रेषितम् ।
= श्रीहरिकोटा से भेजा गया।

ततः कुत्रः प्रेषितम् ?
= वहाँ से कहाँ भेजा ?

ततः अवकाशे प्रेषितम् ।
= वहाँ से अवकाश में भेजा गया।

अवकाशात् कुत्र गतम् ?
= अवकाश से कहाँ गया ?

अवकाशात् चन्द्रयानं चन्द्रमा उपरि अवतरितम्।
= अवकाश से चन्द्रयान चंद्रमा पर उतरा।

चन्द्रयानं चन्द्रस्य परिक्रमापथि भ्रमति।
= चन्द्रयान चन्द्र के परिक्रमा पथ पर घूम रहा है।

ततः कदा प्रत्यागमिष्यति ?
= वहाँ से कब वापस आएगा ?

ओह न , ततः न प्रत्यागमिष्यति।
= ओह नहीं , वहाँ से नहीं लौटेगा।

तत्रैव भ्रमिष्यति।
= वहीं घूमता रहेगा।

ओ३म्

558. संस्कृत वाक्याभ्यासः

अद्य ओणम् पर्व अस्ति।
= आज ओणम पर्व है।

केरलीयाः जनाः एतद् पर्वम् आचरन्ति।
= केरल के लोग इस उत्सव को मनाते हैं।

मन्दिरं गत्वा पूजां न कुर्वन्ति अपितु गृहे एव पूजा क्रियते।
= मंदिर जाकर पूजा नहीं होती है अपितु घर में ही पूजा होती है।

सर्वे जनाः गृहाङ्गणे पुष्पैः सुशोभनं कुर्वन्ति।
= सभी लोग घर के आँगन में फूलों से सुशोभन करते हैं।

बालिकाः , महिलाः च शिरसि पुष्पाणि स्थापयन्ति।
= बालिकाएँ और महिलाएँ सिर पर भी फूल लगाती हैं

सुशोभनं परितः ते नृत्यन्ति।
= सुशीभन के चारों ओर वे नाचते हैं।

नृत्यानां नामानि थिरुवथिरा , कुमकुट्टीकली , थुम्बी इत्यादीनि सन्ति।
= नृत्यों के नाम थिरुवथिरा , कुमकुट्टीकली , थुम्बी इत्यादि हैं।

ते अद्य कदलीपत्रे भोजनं परिवेषयन्ति।
= वे आज केले के पत्ते पर भोजन परोसते हैं।

भोजने पचड़ी , काल्लम् , ओल्लम् , दाव , घृतम् , सांभर , कदलीफलं इत्यादिकं भवति।
=
भोजन में पचड़ी , काल्लम् , ओल्लम् , दाव , घी, सांभर , केला आदि होता है।

कृषकाः सस्यस्य रक्षणार्थं प्रार्थयन्ति।
= किसान फसल की रक्षा के लिये प्रार्थना करते हैं।

महाबलि असुरस्य सत्कारार्थं एतद् पर्वम् आचर्यते।
= महाबलि असुर के सत्कार में यह पर्व मनाया जाता है।

ओ३म्

559. संस्कृत वाक्याभ्यासः

सः कान्दविकः अस्ति ।
= वह मिठाईवाला (हलवाई ) है।

सः मिष्ठान्नानि निर्माति।
= वह मिठाइयाँ बनाता है।

सः रसगोलकानि निर्माति , विक्रीणाति च।
= वह रसगुल्ले बनाता है बेचता है।

सः मोदकानि निर्माति , विक्रीणाति च।
= वह लड्डू बनाता है और बेचता है।

सः प्रातः कुण्डलिकानि निर्माति।
= वह सुबह जलेबियाँ बनाता है।

जनाः प्रेम्णा कुण्डलिकानि खादन्ति।
= लोग प्रेम से जलेबियाँ खाते हैं।

अधुना सः लवणीयकं निर्माति।
= अभी वह नमकीन बना रहा है।

माषगर्भं निर्माति।
= कचौड़ी बना रहा है।

जनेभ्यः माषगर्भः रोचते।
= लोगों को कचौड़ी पसंद है।

ह्यः सः मोमकं निर्मितवान्।
= कल उसने पेड़ा बनाया।

अद्य सायं सः नारिकेलपाकं निर्मास्यति।
= आज शाम को वह नारियलपाक बनाएगा।

ओ३म्

560. संस्कृत वाक्याभ्यासः

अद्य दिव्यशिक्षाकेन्द्रं गमिष्यामि।
= आज दिव्य शिक्षा केन्द्र जाऊँगा।

तत्र बालकाः आगमिष्यन्ति।
= वहाँ बालक आएँगे।

तत्र बालिकाः आगमिष्यन्ति।
= वहाँ बालिकाएँ आएँगी।

महिलाः अपि आगमिष्यन्ति।
= महिलाएँ भी आएँगी।

ते किं करिष्यन्ति ?
= वे क्या करेंगे ?

ते तत्र आगत्य संस्कृतं पठिष्यन्ति।
= वे वहाँ आकर संस्कृत पढ़ेंगे।

प्रतिदिनं पठिष्यन्ति वा ?
= प्रतिदिन पढ़ेंगे क्या ?

नैव , प्रति रविवासरे एव पठिष्यन्ति।
= नहीं , प्रति रविवार को पढ़ेंगे।

कति वादने आगमिष्यन्ति ?
= कितने बजे आएँगे ?

सायं चतुर्वादने आगमिष्यन्ति।
= शाम चार बजे आएँगे।

कति वादन पर्यन्तं पठिष्यन्ति?
= कितने बजे तक पढ़ेंगे ?

सायं षड्वादन पर्यन्तं पठिष्यन्ति।
= शाम छः बजे तक पढ़ेंगे।

ओ३म्

561. संस्कृत वाक्याभ्यासः

रात्रौ एक वादने जागरितवान्।
= रात एक बजे जागा ।

मुखं प्रक्षाल्य स्वस्थः अभवम्।
= मुख साफ कर के स्वस्थ हो गया।

अनन्तरं चन्द्रयानस्य अवतरणप्रक्रियायाः दर्शनम् आरब्धवान्।
= बाद में चन्द्रयान की लैंडिंग प्रक्रिया को देखना शुरू किया।

प्रधानमंत्री महोदयः अपि इसरो केन्द्रं प्राविशत्।
= प्रधानमंत्री महोदय भी इसरो केंद्र में प्रविष्ट हुए।

विविधानां विद्यालयानां छात्राः अपि तत्र उपविष्टाः आसन्।
= विविध विद्यालयों के छात्र भी वहाँ बैठे थे।

अवतरणयानस्य गतिः मन्दा क्रियते स्म।
= लैंडर की गति को धीमा किया जा रहा था।

शनैः शनैः अवतरणयानस्य गतिः मन्दा कृता।
= धीरे धीरे लैंडर की गति धीमी की गई।

अवतरणयानं शनैःशनैः चन्द्रमसि अवतरति स्म।
= लैंडर धीरे धीरे उतर रहा था

सर्वे वैज्ञानिकाः इसरो-नियंत्रणकक्षतः यानस्य संचालनं कुर्वन्ति स्म।
= सभी वैज्ञानिक इसरो नियंत्रण कक्ष से यान का संचालन कर रहे थे।

तदनीमेव सर्वे स्तब्धाः अभवन्।
= तभी सारे स्तब्ध रह गए।

अवतरणयानेन सह सम्पर्कः समाप्तः जातः।
= लैंडर के साथ संपर्क कट गया।

परिक्रमायानं सुरक्षितम् अस्ति।
= ऑर्बिटर सुरक्षित है।

तावती सफलता वैज्ञानिकैः प्राप्ता।
= उतनी सफलता वैज्ञानिकों द्वारा प्राप्त की गई।

वैज्ञानिकाः पुनः प्रयासं करिष्यन्ति।
= वैज्ञानिक पुनः प्रयास करेंगे।

अवश्यमेव सफलतां प्राप्स्यन्ति।
= अवश्य ही सफलता पायेंगे।

ओ३म्

562. संस्कृत वाक्याभ्यासः

मम भोजनम् अभवत्।
= मेरा भोजन हो गया।

अहं भोजनं कृतवान्।
= मैंने भोजन कर लिया।

मम भार्या अपि भोजनं कृतवती।
= मेरी पत्नी ने भी भोजन कर लिया।

अहम् एक होरा अनन्तरं शयनं करिष्यामि।
= मैं एक घंटे बाद सो जाऊँगा।

मध्यरात्रौ एक वादने जागरिष्यामि।
= आधी रात एक बजे जागूँगा।

रात्रौ चन्द्रमसि चन्द्रयानस्य अवतरणं द्रक्ष्यामि।
= रात में चन्द्रमा पर चन्द्रयान का अवतरण देखूँगा।

अस्माकं कृते गौरवस्य विषयः।
= हमारे लिये गौरव की बात है।

इसरो संस्थानस्य सर्वेभ्यः वैज्ञानिकेभ्यः शुभकामनाः।
= इसरो संस्थान के सभी वैज्ञानिकों को शुभकामनाएँ।

भवन्तः सर्वे एतद् गौरवपूर्णं दृश्यम् अवश्यमेव पश्यन्तु।
= आप सभी इस गौरवपूर्ण दृश्य को अवश्य देखें।

ओ३म्

563. संस्कृत वाक्याभ्यासः

अहं सप्तम्यां कक्षायाम् आसम्।
= मैं सातवीं कक्षा में था।

किञ्चित् चंचलतां कृतवान् अहम्।
= कुछ चंचलता की मैंने ।

मम शिक्षिका दृष्टवती।
= मेरी शिक्षिका ने देख लिया।

शिक्षिका – किमर्थं ???
= क्यों ???

– तुभ्यं चञ्चलता बहु रोचते।
= तुम्हें चंचलता बहुत पसंद है।

– तव कर्णौ गृह्णातु।
= तुम्हारे दोनों कान पकड़ो।

अहं मम कर्णौ गृहीतवान्।
= मैंने मेरे दोनों कान पकड़े।

शिक्षिका – वद …. पुनः चञ्चलतां न करिष्यामि।
– बोलो …. फिर से चंचलता नहीं करूँगा।

अहम् – न करिष्यामि….
= नहीं करूँगा ….

शिक्षिका – किं न करिष्यसि ?
= क्या नहीं करोगे ?

अहम् – चञ्चलतां न करिष्यामि।
= चंचलता नहीं करुँगा ।

एवम् उक्त्वा अहम् अरोदम्।
= ऐसा कहकर मैं रो दिया।

सा शिक्षिका माता ह्यः मार्गे मिलितवती।
= वह शिक्षिका माता कल रास्ते में मिल गईं।

अहं तस्याः चरणस्पर्शं कृतवान्।
= मैंने उनके चरण छुए।

सर्वेभ्यः शिक्षकेभ्यः , सर्वाभ्यः शिक्षिकाभ्यश्च शिक्षकदिवसस्य मङ्गलकामनाः।

ओ३म्

564. संस्कृत वाक्याभ्यासः

तस्य ओष्ठौ रक्तवर्णीयौ स्तः।
= उसके दोनों होंठ लाल हैं।

किमर्थम् ?
= क्यों ?

सः ताम्बूलं खादति।
= वह पान खाता है।

तस्य ताम्बूले तमाखू न भवति।
= उसके पान में तम्बाकू नहीं होती है।

( ताम्रचूडः न भवति।
= तम्बाकू नहीं होती है। )

सः ताम्बूले चूर्णकं , कत्थां च लिम्पति।
= वह पान पर चूना और कत्था लीपता है।

पुगीफलम् एलां च स्थापयति।
= सुपारी और इलायची डालता है।

यदाकदा सः लवंगम् अपि स्थापयति।
= कभी कभी लौंग भी डालता है।

( देवकुसुमम् = लौंग )

भोजनान्तरं सः एकं ताम्बूलं खादति।
= भोजन के बाद वह एक पान खाता है।

सः कुत्रापि निष्ठीवनं न करोति।
= वह कहीं भी थूकता नहीं है।

सः औषधरूपेण एव ताम्बूलं खादति।
= वह औषधि के रूप में ही पान खाता है।

ओ३म्

565. संस्कृत वाक्याभ्यासः

अद्य प्रातः संजाता एषा घटना
= आज प्रातः ये घटना घटी

दारिका नामिका एका महिला मम गृहम् आगतवती
= दारिका नाम की एक महिला मेरे घर आई

नाम परिवर्तनं कृत्वा लिखामि
= नाम बदल कर लिख रहा हूँ

सा रोदिति स्म = वह रो रही थी

सा उक्तवती =वह बोली

मम पतिः मां ताडितवान् = मेरे पति ने मुझे मारा

अहं प्रतिदिनं श्रमं करोमि = मैं रोज मेहनत करती हूँ

मम पुत्रस्य शिक्षार्थं धनं संचयामि
= मेरे पुत्र की शिक्षा के लिए धन जोड़ती हूँ

अद्य मम पतिः तद् धनं नीतवान
= आज मेरा पति वो धन ले गया

बलात् नीतवान् = जोर जबरदस्ती से ले गया

तेन धनेन सः मद्यपानं करिष्यति
= उस धन से वह मद्यपान करेगा

मम पुत्रस्य कृते पुस्तकं क्रयणीयम् अस्ति।
= मेरे पुत्र के लिये पुस्तक खरीदनी है।

तस्यै मम भार्या धनं दत्तवती
= उसे मेरी पत्नी ने धन दिया

मद्यपानं तु दूषणम् अस्ति
= मद्यपान दूषण है।

ओ३म्

566. संस्कृत वाक्याभ्यासः

सः श्रीकान्तः अस्ति , सा श्रीकला अस्ति

श्रीकला श्रीकान्तस्य भगिनी अस्ति

श्रीकान्तः श्रीकलाया: भ्राता अस्ति

श्रीकान्तः अष्टाध्यायीम् पठति

श्रीकला धातुपाठं पठति

द्वौ संस्कृत विद्वान्सौ ।

श्रीकान्तः विद्वान् अस्ति

श्रीकला विदुषी अस्ति

तौ द्वौ वेदपाठम् अपि कुरुतः

तौ द्वौ वेद मन्त्राणाम् अर्थम् अपि जानीतः

ओ३म्

567. संस्कृत वाक्याभ्यासः

पत्नी – गृहे एकः मूषकः प्रविष्टः
= पत्नी – घर में एक चूहा घुस गया है

पति: – तर्हि अहं किं करोमि ?
= तो मैं क्या करूँ

पत्नी – अहं बहु चिन्तिता अस्मि
= मैं बहुत चिन्तित हूँ

पति: – किमर्थम् ? = किसलिए ?

पत्नी – मूषकः मम शाटिका: एव खादति
= चूहा केवल मेरी साड़ियाँ ही खाता है

पति: – एवं वा ? = ऐसा क्या ?

पत्नी – आम् = हाँ

पति: – मूषकः मम मित्रम् अस्ति । सः मम युतकं न खादति
= चूहा मेरा मित्र है । मेरी शर्ट नहीं खाता

पत्नी – परिहासं मा करोतु = मजाक मत करिए

पत्नी – किमपि करोतु = कुछ करिये

( पति: उच्चै: वदति = पति जोर से बोलता है )
पति: – ओ मूषक ! रे मूषक ! पश्य , यथा अहं बहिः गच्छामि
= ओ चूहे , ओ चूहे । देखो , जैसे मैं बाहर जा रहा हूँ

पति: – तथैव त्वमपि गृहात् बहिः गच्छ ।
= वैसे ही तुम भी घर से बाहर चले जाओ ।

पतिः – अन्यथा एषा त्वां ताड़यिष्यति
= नहीं तो ये तुम्हें मारेगी

पतिः गृहात् बहिः अगच्छत्
= पति घर से बहार चला गया ।

न जानामि मूषकस्य किं जातम्
= नहीं मालूम कि चूहे का क्या हुआ

ओ३म्

568. संस्कृत वाक्याभ्यासः

शोभा – विभे , चल आवां द्वौ वित्तकोषं चलावः ।
= विभा हम दोनों बैंक चलते हैं

विभा – वित्तकोषम् ? किमर्थम् ?
= बैंक ? किसलिये ?

शोभा – तत्र आवयोः लेखां उद्घाटयावः ।
= वहाँ हम दोनों का अकाउंट खुलवाते हैं

शोभा विभा च वित्तकोषं गच्छतः ।
शोभा और विभा बैंक जाती हैं

ते द्वे प्रपत्रम पूरयतः ।
= वो दोनों फॉर्म भरती हैं

शोभा – अत्र हस्ताक्षरं करणीयम् अस्ति ।
= यहाँ हस्ताक्षर करने हैं

विभा – आम् , तर्हि कुरु , अहमपि करोमि ।
= हाँ , तो करो , मैं भी करती हूँ ।

शोभा – हस्ताक्षरं तु देवनागर्याम् एव करणीयम् ।
= हस्ताक्षर तो देवनागरी में ही करने चाहिये ।

विभा – सत्यम् , अहमपि तथैव करोमि ।
= सच है , मैं भी वैसा ही करती हूँ ।

ते द्वे देवनागर्याम् एव हस्ताक्षरं कुरुतः ।
= वो दोनों देवनागरी में ही हस्ताक्षर करती हैं

ओ३म्

569. संस्कृत वाक्याभ्यासः

सः स्वचित्रं स्वीकरोति।
= वह सेल्फी ले रहा है।

चित्रं सम्यक् न आगतम् ।
= चित्र सही नहीं आया ।

सः पुनः आत्मचित्रं स्वीकरोति।
= वह फिर से सेल्फी लेता है।

सः आत्मचित्रं पश्यति।
= वह अपनी सेल्फी देखता है।

सः केशसंधानं करोति।
= वह बाल बनाता है ।

पुनः स्वचित्रं स्वीकरोति।
फिर से सेल्फी लेता है।

सः स्वं चित्रं पश्यति।
= वह अपना चित्र देखता है।

ओह …. इतः चित्रं सम्यक् न आगच्छति।
= यहाँ से चित्र सही नहीं आता है।

ततः स्वीकरोमि।
= वहाँ से लेता हूँ।

न … न .. अत्र प्रकाशः नास्ति।
= नहीं … यहाँ उजाला नहीं है।

आम् … अत्र स्थानं सम्यक् अस्ति।
= हाँ … यहाँ जगह सही है।

इतः स्वीकरोमि।
= यहाँ से लेता हूँ।

…. उत्तमं चित्रम् आगतम्।
….. बढ़िया चित्र आया

ओ३म्

470. संस्कृत वाक्याभ्यासः

विशाखा – त्वं गृन्जनकं कर्तय
= तुम गाजर काटो

विशाखा – अहं रक्तफलं कर्तयामि
= मैं टमाटर काटती हूँ ।

सुकृतिः – बाढम
= ठीक है ।

सुकृतिः – गृहे त्रपुषम् अपि अस्ति
= घर में खीरा भी है

विशाखा – त्रपुषं तव भ्राता खादिष्यति
= खीरा तुम्हारे भाई खाएँगे ।

सुकृतिः – अद्य भ्राता मूलिकाम् अपि खादिष्यति
= आज भैया मूली भी खाएँगे

सुकृतिः – अद्य वयं पक्वान्नं न खादामः
= आज हम पका खाना नहीं खाते हैं

विशाखा – आम् , अद्य केवलं फलानि शाकानि च खादामः
= हाँ , आज केवल फल और सब्जी खाएँगे

विशाखा – अधुना शाकानि खादामः
= अभी सब्जियाँ खाते हैं

सुकृतिः – अनन्तरं फलानि
= बाद में फल

विशाखा – तव भ्रात्रे दाड़िम्बं रोचते
= तुम्हारे भाई को अनार पसंद है

सुकृतिः – तर्हि आवां सेवफलं खादिष्यावः
= तो फिर हम दोनों सेव खाएँगे

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