००१५ सरल संस्कृत अनुवाद अभ्यास पाठ १५१ से १६०

ओ3म्

151. संस्कृत वाक्याभ्यासः

मम भार्या मह्यम् एकं कार्यम् अददात्
= मेरी पत्नी ने मुझे एक काम दिया था।

अहं तस्याः कार्यं विस्मृतवान्।
= मैं उसका कार्य भूल गया।

यदा अहं मार्गे आसम् …
= जब मैं रास्ते में था …

तदा मम भार्यायाः दूरवाणी आगता।
= तब मेरी पत्नी का फोन आया।

सा अवदत् (सा स्मारितवती)
= वह बोली (उसने याद कराया)

पतञ्जल्याः आपणात् घृतम् आनेतव्यम् अस्ति।
= पतञ्जली की दूकान से घी लाना था।

अन्यानि वस्तूनि अपि मया लिखितानि।
= और भी वस्तुएँ मैंने लिखी हैं।

तस्याः दूरवाणी रात्रौ नववादने आगता।
= उसका फोन रात नौ बजे आया था।

अहं पुनः नगरं प्रति अगच्छम्।
= मैं फिर से शहर की ओर गया।

सा भगिनी आपणं पिधायति स्म।
= वो बहन दूकान बन्द कर रही थी।

मया निवेदनं कृतम्।
= मैंने निवेदन किया।

सा भगिनी पुनः आपणं उद्घाटितवती।
= उस बहन ने फिर से दूकान खोली।

अधुना निश्चिन्तः भूत्वा गृहं गच्छामि।
= अब निश्चिन्त होकर घर जा रहा हूँ।

ओ3म्

152. संस्कृत वाक्य अभ्यासः

अद्य मकरसंक्रांतिः अस्ति।
= आज मकरसंक्रांति है।

समग्रे भारतदेशे अयं पर्व आचरन्ति।
= सारे भारत देश में यह पर्व मनाया जाता है।

तमिलनाडु राज्ये पोंगल इति उच्च्यते।
= तमिलनाडु राज्य में पोंगल कहा जाता है।

बहवः जनाः नद्याम् स्नानं कुर्वन्ति।
= बहुत से लोग नदी में स्नान करते हैं।

अद्य जनाः यज्ञम् कुर्वन्ति।
= आज लोग यज्ञ करते हैं।

यज्ञे तिलस्य आहुतिं ददति।
= यज्ञ में तिल की आहुति देते हैं।

गृहे तिलस्य मोदकानि निर्मान्ति।
= घर में तिल के लड्डू बनाते हैं।

महाराष्ट्रे परस्परं तिलमोदकं दीयते।
= महाराष्ट्र में एकदुसरे को तिल के लड्डू दिए जाते हैं।

ते वदन्ति – तिलमोदकं खाद, मधुरं मधुरं वद..!!
= वे बोलते हैं – तिल के लड्डू खाओ, मीठा मीठा बोलो..!!

गुजराते जनाः वाताटम् डयन्ति।
= गुजरात में लोग पतंग उड़ाते हैं।

सर्वेभ्यः मकरसंक्रान्ति पर्वणः मंगलकामनाः।
= सभी को मकरसंक्रांति पर्व की मंगलकामनाएँ।

ओ3म्

153. संस्कृत वाक्य अभ्यासः

प्रवीणः अद्य नारायणसरोवरं गच्छति।
= आज प्रवीण नारायण सरोवर जा रहा है।

सः परिवार-जनैः सह गच्छति।
= वह परिवार जनों के साथ जा रहा है।

प्रवीणः स्वकीयेन कारयानेन गच्छति।
= वह अपनी कार से जाता है।

मार्गे निर्माणकार्यम् चलति।
= रास्ते में निर्माणकार्य चल रहा है।

अतः सः कारयानं शनैः शनैः चालयति।
= इसलिये वह कार धीमे धीमे चलाता है।

तस्य अनुजा दीक्षा प्रवीणेन सह उपविष्टा अस्ति।
= उसकी छोटी बहन दीक्षा प्रवीण के साथ बैठी है।

दीक्षा मार्गं दृष्ट्वा अवदत्।
= दीक्षा रास्ता देखकर बोली।

पश्यतु भ्रातः ! मार्गः सम्यक् नास्ति।
= देखिये भैया, रास्ता ठीक नहीं है।

इतः आरभ्य तत्र पर्यन्तं मार्गः सम्यक् नास्ति।
= यहाँ से वहाँ तक रास्ता ठीक नहीं है।

ओ ….. ततः मार्गः सम्यक् दृश्यते।
= ओ ….. वहाँ से रास्ता ठीक दिख रहा है।

यथा दीक्षा कथयति तथैव प्रवीणः यानं चालयति।
= जैसा दीक्षा कहती है वैसे ही प्रवीण गाड़ी चलाता है।

तस्य अनुजा दीक्षा प्रसन्ना भवति।
= उसकी छोटी बहन दीक्षा खुश होती है।

ओ3म्

154. संस्कृत वाक्य अभ्यासः

पुत्रः – अम्ब, अद्य शिक्षिका गृहकार्यम् अददात्।
= माँ, आज शिक्षिका ने होमवर्क दिया है।

माता- गृहकार्ये शिक्षिका किम् अददात् ?
= गृहकार्य में शिक्षिका ने क्या दिया है ?

पुत्रः – एकं चित्रं रचनीयम् अस्ति।
= एक चित्र बनाना है।

माता- कस्य चित्रं रचनीयम् अस्ति ?
= किसका चित्र बनाना है ?

पुत्रः – उद्यानस्य चित्रम् अम्ब !
= बगीचे का चित्र माँ !

माता- तर्हि रचय।
= तो फिर बनाओ।

पुत्रः – अहम् उद्यानं गत्वा चित्रं निर्मास्यामि।
= मैं बगीचे जाकर चित्र बनाऊँगा।

माता- उद्याने किं किं भवति तद् अहं वदामि।
= बगीचे में क्या क्या होता है वो मैं बोलती हूँ ।

माता- यद् यद् अहं वदामि तद् तद् रचय।
= जो जो मैं बोलती हूँ वो वो तुम बनाओ ।

माता- त्वमपि प्रतिदिनम् उद्यानं गच्छसि एव।
= तुम भी हर रोज बगीचे जाते ही हो।

पुत्रः – अहं तु तत्र क्रीडनार्थम् गच्छामि।
= मैं तो वहाँ खेलने जाता हूँ।

पुत्रः – अद्य अहं ध्यानपूर्वकम् उद्यानं द्रक्ष्यामि।
= आज मैं ध्यान से बगीचे को देखूँगा।

पुत्रः – तदनन्तरं चित्रं रचयिष्यामि।
= उसके बाद चित्र बनाऊँगा।

माता पुत्राय अनुमतिं ददाति।
= माँ पुत्र को अनुमति देती है।

ओ3म्

155. संस्कृत वाक्य अभ्यासः

गतदिने सः बहु उग्ररू जातः।
= कल वह बहुत उग्र हो गया था।

मम कार्यालयम् आगत्य माम् अवदत्।
= मेरी ऑफिस में आकर मुझसे बोला।

सर्वप्रथमं मम कार्यम् कुरु।
= सबसे पहले मेरा काम करो।

त्वं सर्वेषां कार्यम् करोषि।
= तुम सबका काम करते हो।

ममैव कार्यम् न करोषि।
= मेरा ही काम नहीं करते हो।

यावत् मम कार्यम् न भवति…
= जब तक मेरा काम नहीं होता…

तावत् इतः अहं न गमिष्यामि।
= तब तक मैं यहाँ से नहीं जाऊँगा।

कति दिनानि अभवन्….?
= कितने दिन हो गए….?

मम कार्यम् लम्बितम् अस्ति।
= मेरा काम लटका हुआ है।

अहम् अवदम्।
= मैं बोला।

महोदय , भवतः कार्यम् अभवत्।
= महोदय, आपका काम हो गया।

गतदिने एव पत्रं प्रेषितम्।
= कल ही पत्र भेज दिया।

सः सज्जनः त्वरितमेव गृहम् अगच्छत्।
= वह सज्जन तुरंत घर चला गया।

ओ3म्

156. संस्कृत वाक्य अभ्यासः

सा पुत्रम् आलिङ्गति।
= वह बेटे को आलिंगन करती है।

किमर्थं ? जानन्ति वा ?
= क्यों ? जानते हैं ?

तस्याः पुत्रः सेनायाः अधिकारी अभवत्।
= उसका बेटा सेना का अधिकारी बन गया।

सा माता पदवीदान समारोहे उपस्थिता आसीत्।
= वह माँ पदवीदान समारोह में उपस्थित थी।

तस्याः पुत्रः नौसेनायाम् अधिकारी भविष्यति।
= उसका बेटा नौसेना में अधिकारी बनेगा।

सा गर्वम् अनुभवति।
= वह गर्व अनुभव करती है।

मम पुत्रः राष्ट्रस्य रक्षां करिष्यति।
= मेरा बेटा राष्ट्र की रक्षा करेगा।

गृहात् दूरे एव स्थास्यति चेत् का हानिः..!
= घर से दूर रहेगा तो क्या हानि..!

सः भारतमातुः अङ्के सर्वदा विराजिष्यते।
= वह हमेशा भारत माँ की गोदी में विराजमान रहेगा।

आतंकवादिनाम् अपि संहारं करिष्यति।
= आतंकवादियों का भी संहार करेगा।

ओ3म्

157. संस्कृत वाक्य अभ्यासः

कति जनाः दूरवाणीम् कुर्वन्ति ?
= कितने लोग फोन करते हैं ?

एकस्य वार्ता समाप्ता भवति।
= एक की बात समाप्त होती है।

तदानीमेव अन्यस्य कस्यपि दूरवाणी आगच्छति।
= उसी समय और किसी का फोन आता है।

अधुना प्रवीणेन सह वार्तालापः चलति।
= अभी प्रवीण के साथ बात चल रही। है।

तन्मध्ये संदीपस्य दूरवाणी आगच्छति।
= उसके बीच में संदीप का फोन आ जाता है।

सुबोधस्य दूरवाणीम् तु परिहरामि।
= सुबोध का फोन तो मैं टालता हूँ।

सुबोधः दीर्घाम् वार्ताम् करोति।
= सुबोध बहुत लंबी बात करता है।

शिखा तु वारं वारं दूरवाणीम् करोति।
= शिखा तो बार बार फोन करती है।

समयम् अपि न पश्यति।
= समय भी नहीं देखती है।

यदाकदा प्रातः षड्वादने..
यदाकदा रात्रौ एकादशवादने।
= कभी कभी सुबह छः बजे..
= तो कभी कभी रात ग्यारह बजे।

अधुना सर्वे दूरवाण्या एव कार्यम् सम्पादयन्ति।
= आजकल सभी फोन से ही काम पूरा करते हैं।

ओ3म्

158. संस्कृत वाक्य अभ्यासः

सः भारतीयः युवकः अस्ति।
= वह भारतीय युवक है।

तम् भारतीयं युवकं सर्वे जानन्ति।
= उस भारतीय युवक को सब जानते हैं।

तेन भारतीयेन युवकेन श्रेष्ठं कार्यम् क्रियते।
= उस भारतीय युवक के द्वारा अच्छा काम किया जा रहा है।

तस्मै भारतीयाय युवकाय सर्वदा स्वस्तिः कामये।
= उस भारतीय युवक के लिए हमेशा स्वस्ति की कामना।

तस्मात् भारतीयात् युवकात् सर्वे बिभ्यति।
= उस भारतीय युवक से सब डरते हैं।

तस्य भारतीयस्य युवकस्य नाम किम् अस्ति ?
= उस भारतीय युवक का नाम क्या है ?

तस्य भारतीयस्य युवकस्य नाम नरेन्द्र मोदी अस्ति।
= उस भारतीय युवक का नाम नरेन्द्र मोदी है।

तस्मिन् भारतीये युवके सर्वे विश्वसन्ति।
= उस भारतीय युवक पर सबको विश्वास है।

ओ3म्

159. संस्कृत वाक्य अभ्यासः

कुछ दिन तक अपने पाठ को हिन्दी भाषा में लिखकर प्रारम्भ करना चाहता हूँ।

संस्कृत सीखने की चाह रखने वाले ( इच्छुक ) लोग आज भी हमारे समाज में अनेक हैं। ठीक उसी प्रकार संस्कृत सिखाने, पढ़ाने वाले भी अनेक हैं।

संस्कृत सिखाने, पढ़ाने वाले बहुत से लोग व्याकरण का ज्ञान देते हुए संस्कृत पढ़ाते हैं, तो कुछ लोग सीधे संस्कृत सम्वाद सिखाने का काम करते हैं।

व्याकरण का बोध सरलता से देना और सरलता से पाना यह सबके वश की बात नहीं होती है। यही कारण है कि जब व्याकरण समझ नहीं आता तब प्रायः सभी लोग व्याकरण से दूर भागने लग जाते हैं।

और संस्कृत व्याकरण को तो कुछ लोगों ने अज्ञानतावश और पूर्वाग्रह के चलते कठिन, क्लिष्ट, दुरूह आदि की संज्ञा दे डाली है।

जिन्हें व्याकरण कठिन लगता है उनके लिये यह आवश्यक नहीं है कि वे अष्टाध्यायी महाभाष्य पढ़कर संस्कृत सीखें। जब कि वे चुने हुए कुछ वाक्यों को अपने दैनिक वार्तालाप का हिस्सा बना लें।

जैसे –

आपसे कोई भी व्यक्ति किसी भी भाषा में नाम पूछे, पर आप तो उत्तर संस्कृत में ही दीजिये।

किसी ने पूछा- “वॉट इज यूवर नेम..?”

आपका उत्तर तो संस्कृत में ही होना चाहिये।

उत्तर- मम नाम अखिलेशः।

– मम नाम विनीता।

– मम नाम योगेन्द्रः।

– मम नाम सुधीरः। आदि ….

‘सॉरी’ न कहें , ‘क्षम्यताम्’ कहा करें।

“थैंक यू” न कहें , ‘धन्यवादः’ कहा करें।

‘प्लीज’ न कहें, ‘कृपया’ कहा करें।

‘वेलकम’ न कहें, ‘स्वागतम्’ कहा करें।

दैनिक व्यवहार से संस्कृत दूर हो गई तो संस्कृति नष्ट हो जाएगी। संस्कृति नष्ट हो गई तो हमारी ही भाषा, शिक्षा, व्याकरण आदि सब कठिन लगने लग जाएँगे।

संस्कृत के छोटे छोटे शब्दों को अपनी दैनिक व्यवहार की भाषा में पुनः स्थान दीजिये। बार बार संस्कृत शब्दों को बोलिये, सबके सामने बोलिये। अधिक से अधिक क्या होगा ? प्रारम्भ में लोग हँसेंगे… पर हमें संस्कृत को बढ़ाना है, संस्कृत का संवर्धन करना है तो इसी प्रकार से संस्कृत सम्वाद का शुभारम्भ करना होगा।

मुझे आशा है कि जिन लोगों को संस्कृत व्याकरण का ज्ञान नहीं है वे लोग भी इस पद्धति का अनुसरण करते हुए संस्कृत के पास आएँगे और संस्कृत से स्नेह बढ़ाएँगे।

आगे कुछ दिनों तक “संस्कृत वाक्य अभ्यास” नाम से पाठों का तरीका यही रहेगा।

मदर नहीं वह है माता मेरी।
फादर नहीं वह पिता हैं मेरे।

मॉर्निंग नहीं यह है ‘प्रातः’ प्यारा।
इवनिंग नहीं यह ‘सन्ध्या’ प्यारी।

वॉटर नहीं ‘जल’ पियो रे प्यारे।

मिल्क नहीं ‘दुग्धम्’ मीठा रे।

चलो संकल्प करें हम संस्कृत शब्दों को अपनाएँगे, अपनी भाषा को प्राञ्जल और सुदृढ़ बनाएँगे।

ओ3म्

160. संस्कृत वाक्य अभ्यासः

संस्कृत सीखने की चाह रखने वालों के उद्देश्य भिन्न भिन्न होते हैं।

वे लोग जिन्हें वेदमन्त्रों को अर्थसहित समझने की ललक होती है। केवल वेद को ही गहराई से समझना चाहते हैं तथा वेद का सटीक, शुद्ध भाष्य पढ़ना और पढ़ाना चाहते हैं।

वे लोग जिन्हें वेद, वेदाङ्ग, उपनिषद्, दर्शन आदि भी पढ़ने की इच्छा होती है।

वैदिक ग्रन्थों का अध्ययन करने की रुचि वाले लोग अष्टाध्यायी, महाभाष्य, काशिका, निघण्टु आदि को पढ़ते हैं और संस्कृत व्याकरण का गहन अध्ययन करते हैं।

वे लोग जो संस्कृत पढ़ कर आजीविका पाना चाहते हैं।

वे लोग जो शौक के लिये संस्कृत पढ़ना चाहते हैं।

वे लोग जो संस्कृत की विरासत को सम्भाल कर रखना चाहते हैं।

वे लोग जो नित्य संस्कृत में बातचीत करना चाहते हैं।

आप इनमें से जिस भी वर्ग के हों प्रतिदिन अभ्यास नहीं करेंगे तब तक आप संस्कृत नहीं सीख पाएँगे।

आईये अभ्यास करें-

अहम् = मैं
सः = वह ( पुलिँग )
सा = वह ( स्त्रीलिंग)
एषः = यह ( पुलिँग)
एषा = यह ( स्त्रीलिंग)
भवान् = आप ( पुलिँग)
भवती = आप ( स्त्रीलिंग)

अस्मि = हूँ।
अस्ति = है।

अहम् अस्मि। = मैं हूँ।

सः अस्ति = वह है।
सा अस्ति = वह है।
एषः अस्ति = यह है।
एषा अस्ति = यह है।
भवान् अस्ति = आप हैं।
भवती अस्ति = आप हैं।

नियम-
1) संस्कृत में वार्तालाप का अभ्यास करने के लिए पहले दो दो शब्दों के वाक्य बोलें।
2) सर्वप्रथम एकवचन में ही वाक्यों का अभ्यास करें।

शनैः शनैः आप संस्कृत में बोलने लग जाएँगे।

निवेदक

अखिलेश आचार्य
संस्कृत सेवक
आदिपुर ( गुजरात )

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