बाल शिक्षा

मंच पर आसीन आदरणीय महानुभावों एवं मान्यवर श्रोताओं तथा प्यारे मित्रों आज मैं आपको बाल शिक्षा के विषय में जो ज्ञान मैंने इस शिविर में प्राप्त किया है उसकी जानकारी दूंगा.

महानुभावों शिक्षक तीन होते हैं- 1. माता, 2. पिता एवं 3. गुरु। माता को सबसे उत्तम शिक्षक इसलिए कहते हैं क्योंकि वह नौ माह अपने उदर में निकटतम रखती अधिकतम हित करनेवाली प्रथम पुरोहित है। सन्तानों के लिए प्रेम एवं हित की भावना उसमें सर्वाधिक होती है।

सन्तानों के प्रति माता-पिता के कर्त्तव्य इस प्रकार के हैं- 1. बालक को शुद्ध उच्चारण सिखलाना, 2. सन्तानों को उत्तम गुणों से युक्त करना, 3. छोटे-बड़ों से व्यवहार करना सिखलाना, 4. धर्म की शिक्षा देना आदि।

आज-कल समाज में भूतिया सिरियल-सिनेमाओं एवं पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से भूत-प्रेत विषयक अन्धविश्वास खूब फैलाया जा रहा है। जब कि इस में कोई सच्चाई नहीं होती। अविद्या, कुसंस्कार, भय, आशंका, मानसिक रोग, धूर्तों के बहकाने से लोग भूत-प्रेत मानने लग जाते हैं।

मरने के बाद हम पाप-पुण्य का फल भोगने के लिए फिर से जन्म लेते हैं। हमें दूसरे जन्म में ईश्वर भेजता है।

समाज में अनेकों अन्धश्रद्धाएं प्रचलित हैं.. कुछ लोग मानते हैं कि मन्त्र फूंकने से किसी रोग की चिकित्सा होती है जो कि सरासर झूठ है। हमारे जीवन में सुख-दुःख ग्रहों के कारण सें होते हैं यह मान्यता भी मिथ्या ही जानना चाहिए। मंगल, शनि आदि ग्रहों का हमारे कर्मों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, क्योंकि ये जड़ होने से इनका सभी पर समान ही प्रभाव होता है..

जन्म-पत्र में लिखी गई बातें क्या सच नहीं होती। हम कर्म करने में स्वतन्त्र हैं, इसलिए हमारे भविष्य की बातें कोई नहीं जान सकता, इसीसे जन्म-पत्र की बातें झूठ सिद्ध होती हैं। दूसरों की हानि पर ध्यान न देकर केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करना छल-कपट कहलाता है।

माता-पिता और गुरुजनों का सदैव आज्ञाकारी होना तथा अपनी विद्या और शरीर का बल सदा बढ़ाते रहना विद्यार्थी का मुख्य कर्त्तव्य है। हमारे जीवन से बुराइयों को हटाने के लिए माता-पिता एवं गुरुजन हमें दण्ड देते हैं। दण्ड प्राप्त होने पर हमें विचारना चाहिए कि मेरे अपने सुधार के लिए दण्ड दिया गया है। क्रोध न करते हुए खुद को सुधारने का प्रयास करना चाहिए।

विद्यार्थी को सदाचारी होना चाहिए.. सदाचार के तीन उदाहरण इस प्रकार हैं.. 1. शान्त, मधुर और सत्य बोलना, 2. बड़ों को नमस्ते करना, 3. माता, पिता एवं गुरुजनों की सेवा करना। आशा करता हूँ बाल शिक्षा सम्बन्धि मेरे द्वारा कही गई बातें आप सभी महानुभावों को अवश्य पसन्द आई होंगी। इन्हीं बातों के साथ मैं अपनी वाणी को यहाँ विराम देता हूँ.. धन्यवाद..!!

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