परीक्षा में सफलता के 101 सूत्र

परीक्षा में सफलता के १०१ सूत्र

परीक्षा पूर्व
पढ़े चलो
पढ़े चलो
चलता हुआ सतयुग है।
उठकर खड़ा हुआ त्रेता है।
करवट बदलता द्वापर है।
सोता हुआ कलयुग है।
तुम सतयुग हो।।१।।

परीक्षा कोर्स के विषयों में सर्वव्यापकता का नाम है। जो विषयों में जितना जितना सर्वव्यापक है वह उतने उतने अंक पाएगा। शत प्रतिशत अंक पाना असंभव नहीं है।।२।।

शत प्रतिशत कोर्स से अधिक भी तुम पढ़ सकते हो। शत प्रतिशत से अधिक पढ़ने से अंक सहजतः अधिक मिलते हैं।।३।।

पच्चीस पचहत्तर सिद्धान्त से पढ़ो।
पहली बार पूरी पुस्तक पढ़ो। दूसरी बार पूरी पुस्तक पढ़ते समय सार सार पच्चीस प्रतिशत पेंसिल से रेखांकित कर लो। भविष्य में सार सार पढ़ो।।४।।

सार सार का सार संक्षेप करीब पचास प्रतिशत निकालो जो पूरी पुस्तक का मात्र साढ़े बारह प्रतिशत होगा। यह नोट्स है।।५।।

सार संक्षेप को अपने विचार तथा चिन्तन में ढालो। आस-पास, पेपर, पत्रिका, रेडियो, टी.व्ही., चर्चा सार संक्षेप संबंधि विवरण तुलना से याद रखो।
परीक्षा स्मरण परीक्षा है। तुलना स्मरण का आधार सच है।।६।।

उन्मुक्त मस्तिष्क पढ़ो। सोने के बाद, मनोरंजन के बाद, टहलने के बाद, योग साधना के बाद मस्तिष्क उन्मुक्त होता है।।७।।

याद रखो मानव मस्तिष्क एकाग्रता सीमा दस से पंद्रह मिनट है। इतना सतत पढ़ने के बाद सतत अंगड़ाई लो। हरितमा देखो। आकाश देखो। आती जाती श्वांस देखो। फिर आगे पढ़ो।।८।।

पढ़ने में विषय परिवर्तन अपने आप में एक मनोरंजन है। विषय परिवर्तन लाभ लो- गणित के बाद हिन्दी पढ़ो।।९।।

मस्तिष्क में सर्वाधिक जल है। पढ़ने से पूर्व जल पियो। मध्य में प्यास लगते ही जल पियो।।१०।।

स्व-आकलन स्मरण की आत्मा है। बस में, ट्रेन में, रात को सोते समय, सिनेमाघर मध्यान्तर में पढ़े हुए का स्मरण कर स्व-आकलन करो।।११।।

नवीनता परीक्षा सफलता की कुंजी है। नूतनतम ज्ञान से भरो खुद को। परीक्षा में यथा स्थान नूतनतम का प्रयोग अवश्य करो।।१२।।

बहुआयामी, बहुउपयोगी मुहावरे याद कर लो। यथा- ‘‘गुलाब तो गुलाब है’’, ‘‘अमेरिकन बड़े गुलाब हेतु आस पास की कलियां नोचना जरूरी है’’, ‘‘प्रौद्योगिकी लंगड़ी लड़की है कूद-कूद कर आती है’’, ‘‘अवसर पीछे से गंजा है’’ आदि। इनका उत्तरों में सप्रयास प्रयोग करो।।१३।।

और तकनीकों जैसे परीक्षा हेतु पढ़ना भी तकनीक है। पठन तकनीक का प्रयोग करो।।१४।।

हर पढ़ने में आई नई बात एक ‘‘किक्’’ देती है। यह संसार की सर्वश्रेष्ठ ‘‘किक्’’ है। ऐसे किक् आह्लादों से झूमो। पढ़ाई आनन्द हो जाएगी।।१५।।

भूलो मत जल स्नान से तन हलका होता है। पठन स्नान से मस्तिष्क हलका होता है। पढ़ना बोझ कतई नहीं है। हो भी नहीं सकता। लाख किताबे बंद्धि लाख गुना सूक्ष्म करती हैं।।१६।।

स्वच्छ रात तारों भरे आकाश का सेवन करो। प्रातः सूर्योदय तथा संध्या सूर्यास्त का सेवन करो। ये चिन्तन उदात्त करते हैं। उदात्त चिन्तन जीवन को क्रमबद्ध करता है। पढ़ना क्रमबद्ध जीवन में सरल होता है।।१७।।

स्थूल तथा अल्पबुद्धि रास्ता सफलता का महाद्वार है। कम पढ़ने से कम याद रहता है।।१८।।

गहन तथा सूक्ष्म रास्ता सफलता का महाद्वार है। ज्यादा पढ़ने से ज्यादा याद रहता है।।१९।।

परीक्षा तुम्हारे लिए है। तुम परीक्षा के लिए नहीं हो। पढ़ाई से बड़े होकर पढ़ो। ज्यादा याद रहेगा।।२०।।

इस दृष्टि से पढ़ो कि कल ही परीक्षा है। जो हर समय परीक्षा देने के तैयारी में है परीक्षा उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।।२१।।

विद्यार्थी विद्या का अर्थी होता है। विद्या अर्थ में निहित होती है। अर्थ सूक्ष्म धरातल पर उतरता है। अर्थ से जुड़ो। परिभाषाएं अर्थ हैं।।२२।।

सूक्ष्म धरातल साधना की उपलब्धि है। साधना शुभ विचारों से पूर्ण होती है। इक्कीस मिनट तक लगातार रहने पर शुभ विचार जिनेटिक कोड पर स्थाई अंकित हो जाते हैं। शुभ ही शुभ सोचो।।२३।।

भाग्य भरोसे पढ़ने वालों का परीक्षा में भाग्य भी बैठ ही जाता है।।२४।।

सत्तार्थ- सामाजिकता के लिए।
लाभार्थ- लाभ के लिए।
उपयोगार्थ- उपयोग के लिए।
विचारार्थ- विचार के लिए।
चार के लिए पढ़ना सफलता ही सफलता।।२५।।

महेश योगी संस्थान के प्रयोग बताते हैं कि चेतना विस्तरण से मस्तिष्क सर्वाधिक सामंजस्यपूर्ण अवस्था को प्राप्त करता है। इस अवस्था वह सर्वाधिक उर्वर होता है। व्यापक सोचो।।२६।।

चेतना विस्तरण के महासूत्र हैं- ‘‘अल्लाह सर्वव्यापक एक है’’, ‘‘अगाओ ऊंचाइयों से उतरता है’’, ‘‘ओऽम् खं ब्रह्म’’, ‘‘ओऽम् नारायणः’’, ‘‘आमीन’’, ‘‘एक अनन्त’’, ‘‘सूक्ष्मतम महानतम’’, ‘‘अगाओ थम’’, ‘‘शान्तिः शान्तिः शान्तिः’’ आदि। ये साधना सूत्र हैं। अतिपठन से उत्पन्न इन्द्रिय थकान भगाने की रामबाण औषधि हैं ये सूत्र। इन्हें जपो।।२७।।

परीक्षा हमेशा स्मरण आधारित ही रहेगी। स्मरण आत्मा का गुण है। बुद्धि आत्मा की पहचान है। इसके महासूत्र सत्ताइस हैं।।२८।।

स्मरण की इच्छा होना स्मरण मजबूत करता है। एक विषय पर एकाग्रता इच्छा को पक्का करती है।।२९।।

एक पुस्तक के अनेक परस्पर अर्थों को संयुक्त संबंधित करना निबंध है। इससे स्मरण बढ़ता है।।३०।।

बार बार पठन दुहराव से याद में विषय जम जाता है। यह स्मरण अभ्यास है।।३१।।

निशान से निशानी तक पहुंचने का प्रयास करें। धुंए से अग्नि, पढ़ने से परीक्षा, परीक्षा से नौकरी आदि से अधिक स्मरण होता है।।३२।।

चिह्न स्मरण कराते हैं। ध्वज देश का, चुनाव चिह्न राजनैतिक दल का, गेरुआ रंग सन्यासी का, कपि ध्वज अर्जुन रथ का स्मरण आधार है। ऐसे ही चिह्न शिक्षा हेतु चुन लें।।३३।।

समानता से तुरन्त स्मरण होता है। चित्र से व्यक्ति का, मार्टिन लूथर अफ्रिकी गांधी थे। नचिकेता- कठोपनिषद से नचिकेता पायलेट का।।३४।।

युगलता से स्मरण- राजा से रानी का, स्वामी से सेवक का, प्रश्न से उत्तर का।।३५।।

आश्रय से स्मरण- पेन से ढक्कन का, कुर्ते से पायजमे का, शिक्षक से पढ़ाई का, उपाधि से शिक्षा का।।३६।।
आश्रित से स्मरण- ताश से बावन पत्तों का,ातरंज से सोलह खानों, मुहरों का आदि।।३७।।

संबंध से स्मरण- रिश्ते-नाते से संबंधियों का, घराने से संगीत परंपरा का, खेल से खिलाड़ियों का आदि।।३८।।

सातत्य से स्मरण- नौकरी से प्रमोशन, रिटायरमेंट का; वेद से पाठों का, संगीत से स्वरों आवर्त सारिणी आदि का सातत्य से स्मरण होता है।।३९।।

वियोग से संयोग का स्मरण- रासायनिक सूत्र, विघटन, संश्लेषण आदि। शून्य त्रुटि से त्रुटि सुधार का।।४०।।

एक कार्य से स्मरण- दशरूपकम से प्रकरी, पताका, अधिकारिक, परियोजना निर्माण से समूह कार्यों का, समूहों का, पदों का।।४१।।

दुश्मनी से स्मरण- सांप-नेवला, कुत्ता-बिल्ली, चील-चूजा, चूहे-बिल्ली आदि का।।४२।।
रिकार्ड से स्मरण- लिम्का या गिनिज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड का, कपिल से सर्वाधिक विकेट लेने का, गावस्कर के अधिकतम रन का आदि।।४३।।

प्राप्ति से स्मरण- नौकरी से वेतन का, बैंक से पैसे का, कारखाने से उत्पादन का, न्यायाधीश से दंड का, प्रमोशन से बॉस का आदि।।४४।।

व्यवधान से स्मरण- घूंघट से रूप का, भारत उत्तर में हिमालय का, चीन की दीवार का आदि।।४५।।

सुख के कारणों से स्मरण- अतिशय सुखमय घटनाओं का, राष्ट्रीय संदर्भ में स्वतन्त्रता दिवस का, भारत-पाक युद्ध में विजय का, भारत की विश्वकप में जीत का, अमर्त्य सेन नोबल पुरस्कार प्राप्ति आदि का।।४६।।

दुःख के कारणों से स्मरण- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का निधन, राष्ट्रव्यापी अकाल, भूकम्प, ध्वंस, ज्वालामुखी फटना आदि।।४७।।

द्वेष से स्मरण- इष्ट संबंधी द्वेष- इष्ट क्षेत्र दूसरे की अभिवृद्धि से, अनिष्ट संबंधी द्वेष- दूसरे को अनिष्ट में ढकेलना आदि।।४८।।

इच्छापूर्ति से स्मरण- गौरव प्राप्ति से, महान पुरुष संन्निधि से, उत्तम पुस्तक पठन से, इच्छापूर्ति व्यवधान से, एक नम्बर से फंल होने से, जीतते-जीतते हार जाने से आदि।।४९।।

भय से स्मरण- परीक्षा भय से पठन, स्मरण, किसी चीज की भावी क्षति भय से पठन-स्मरण, मां-पिता वात्सल्य भय से स्मरण प्रयास आदि।।५०।।

आर्थिक लाभ से स्मरण- इनाम के कारण, नौकरी के कारण, सुखद भविष्य के कारण।।५१।।
क्रिया से स्मरण- कर्ता, अकर्ता, सुकर्ता, कुकर्ता आदि का इतिहास क्षेत्र का स्मरण क्रिया से होता है।।५२।।

राग से स्मरण- चाहना से जल्दी स्मरण होता है। ना चाहना से भी स्मरण होता है पर प्रथम स्मरण श्रेष्ठ है।।५३।।

धर्म से स्मरण- जीवन लक्ष्य प्राप्ति पथ धर्म है। इस पथ पर स्मरण सहज होता है।।५४।।
अधर्म से स्मरण- जीवन लक्ष्य से गिर जाने का पश्चाताप होने पर भी उसके स्मरण की ओर देर-अबेर प्रवृत्ति हो जाती है।।५५।।

सत्ताइस सूत्रों का बहुआयामी उपयोग स्मरण को नए आयाम देता है। यह परीक्षा विजय का सकारात्मक पक्ष है।।५६।।

तनावमुक्त पढ़ना ही सर्वाधिक लाभप्रद है। तटस्थता बोध की आत्मा है। परीक्षा पूर्व स्थिति अधिक तनावमुक्त होती है। इस स्थिति में नियमबद्ध थोड़ी-थोड़ी पढ़ाई भी बड़ी समझ देती है जो परीक्षा में उपयोगी है।।५७।।

सर्व से अंश पढ़ें। पुस्तक का प्राक्कथन, भूमिका और विषयवस्तु जरूर पढ़ें। विषयवस्तु के एक-एक शीर्षक पर अपनी याददाश्त से संदर्भित विचार सोचें। पुस्तक पूरी पढ़ने के बाद यही प्रक्रिया दुहराएं।।५८।।

विषयवस्तु के आधार पर पूरी पूस्तक की संक्षेपिका पुस्तक के आकार के मात्र पांच प्रतिशत में बनाएं। इसे बीच-बीच में दुहराते रहें।।५९।।

मात्र पांच वर्ष के प्रश्नपत्र देखें। उनमें से बीस दुहराव वाले, तिहराव वाले, चतुराव वाले चुन लें। उन्हें अत्यधिक ध्यानपूर्वक तैयारी करें।।६०।।

छुट्टियों के समय टाइम टेबल बनाने का सरल तरीका है कि स्कूल या कालेज के टाइम टेबल के अनुरूप पढ़ाई करें। अन्य समय का मोटा-मोटा टाइम टेबल बना लें।६१।।

लेटकर पढ़ने की तुलना में बैठकर पढ़ने से मस्तिष्क दस प्रतिशत अधिक कार्य करता है। बैठकर पढ़ने की तुलना में खड़े होकर पढ़ने से मस्तिष्क दस प्रतिशत अधिक कार्य करता है। वज्रासन में मस्तिष्क दस प्रतिशत और अधिक कार्य करता है।।६२।।

परीक्षा तिथि घोषणा के बाद
तत्काल पठन ‘‘दशरूपकम्’’ चित्र बनाएं। इसमें परीक्षा तिथियां भी शामिल हों। अधिकारिक, प्रकरी, पताका भरें। अधिकारिक पर मुख्य विषय तथा प्रकरी पर सामान्य विषय रखें।।६३।।

हर विषय कम से कम चार बार दुहराना आवश्यक है। पहला पूरा, दूसरा पच्चीस प्रतिशत, तीसरा नोट्स और चौथा संक्षेपिका।।६४।।

दशरूपकम् का अर्थ है समानान्तर पढ़ाई। गणित के समानान्तर हिन्दी पढ़ें, विज्ञान के समानान्तर समाजशास्त्र पढ़ें तो परिवर्तन अथकान पूर्ण होगा। पठन योजना इस अनुरूप बनाना तथा विषयादि का समय निर्धारण करना, पढ़ाई सुव्यवस्था है।।६५।।

याद रखें, जितनी बार विषय दोहराया जाएगा उतना ही याद रहेगा। लंदन के डॉ.होवे की बीस वर्ष की शोध का परिणाम है कि बौद्धिक प्रखरता कड़े परिश्रम का फल है न कि जन्मजात।।६७।।

ध्यान रहे चालीस प्रतिशत तक अंक कम महनत से, पचास प्रतिशत तक महनत से, साठ प्रतिशत तक मेहनत से तथा उससे अधिक प्रति अंक पाने पूर्व से तिगुनी महनत लगती है।।६८।।

इस समय के दौरान सात्विक भोजन करें। रात्रि भोजन जल्दी करें। दिवस में भी पढ़ने का टाइम टेबल बनाएं। ताजग रहें। सहज रहें। तनाव से बचें।।६९।।

लिरिक से संक्षिप्त प्रथमाक्षरों से अक्षर बना के, वेदमन्त्र चरणों से, दोहा चरणों से विषय याद करें।।७०।।
परीक्षा दिवस
प्रातः थोड़ा जल्दी उठें। बिस्तर पर ही स्व आकलन करें। समयानुसार पच्चीस प्रतिशत नोट्स तथा संक्षेपिका का अध्ययन करें। दही-शक्कर खाकर परीक्षा देने जाएं। भूखे पेट या अधिक खाकर पेपर देने न जाएं।।७१।।

रिक्शे या ऑटो या दूसरे के वाहन पर जाते जाते स्व आकलन करें। जितना याद है उतना दोहराएं। दीर्घ श्वास-प्रश्वास लेते रहें। तन ओषजन कमी मस्तिष्क भारी करती है।।७२।।

परीक्षा हॉल में प्रवेश पूर्व संक्षेपिका पढ़ लें। याददाश्त का समय नियम कहता है तत्काल पढ़ा तत्काल पूरा याद रहता है। समय बीतते कम होता चला जाता है। इस नियम को याद रखें।।७३।।
कॉपी का इन्तजार करते आती-जाती श्वास प्रश्वास को तटस्थ भाव से देखते रहें। कॉपी हाथ में आते ही उदात्त वाक्य दुहराएं-
ज्ञान हमारा भैया है
महनत अपनी बहना है
मानवता अपनी देवी है
हर हित जीते रहना है।७४।।

धीरजपूर्वक कॉपी में यथा स्थान रोल नंबर, दिवस, तिथि आदि विवरण भरें। हाशिया छोड़ें।।७५।।

पेपर की प्रतीक्षा में आती-जाती श्वास प्रश्वास देखें। देखने से श्वास प्रश्वास कम अधिक नहीं होनी चाहिए। पेपर धीरजपूर्वक लें। इष्ट का नाम लें।।७६।।

सहजतः पेपर पढ़ें। ऊपर दी टिप्पणी भी पढ़ें। प्रश्नों पर क्रम लिखें। परिभाषाएं या नोट लिखो आदि वाला प्रश्न पहले क्रम में ना रखें। एक उत्तम एक औसत एक उत्तम एक औसत क्रम में प्रश्न चयनित करें।।७७।।

घुड़दौड़ शुरु। स्मरण रखें तीव्र गति से लिखना है।।७८।।

छै प्रश्न तीन घंटे होने पर प्रति उत्तर सत्ताइस मिनट, पांच प्रश्न तीन घंटे होने पर प्रति उत्तर तैंतीस मिनट समय निर्धारित करें।।७९।।

प्रश्न के उत्तर को निम्नलिखित खंड़ों में बांटिए-
१.प्रस्तावना या भूमिका या सामान्य विवरण या आरम्भ या शुरुआत।
२.पांच उपखंड। शीर्षक प्रश्नानुसार होंगे। शीर्षक मध्य में ऊपर देना है। एक पंक्ति छोड़ विवरण लिखना है। नया शीर्षक एक पंक्ति बाद देना है।
३.हर उपखंड के पांच-पांच पॉइण्ट होंगे जो करीब डेढ़-डेढ़ लाइन के होंगे।
४.प्रति प्रश्न का बिखराव करीब साढ़े तीन पेज होगा।।८०।।

नया उत्तर नए पृष्ठ से प्रारम्भ करेंगे। एक गिलास पानी पिएंगे। प्रथम प्रश्न में अतिरिक्त लगे समय की क्षतिपूर्ति का प्रयास करेंगे।।८१।।

तीसरा उत्तम उत्तर हल करेंगे। इसके बाद दो या तीन खंडों वाला उत्तर लिखेंगे- अर्थात् टिप्पणी लिखने वाला या नोट लिखने वाला।।८२।।

आवश्यक नहीं आपको हर प्रश्न आए ही। उत्तर देने से पूर्व प्रश्न पूरा लिखें। लिखने से प्रश्न कई बार अच्छे से समझ आ जाता है तथा उसके शाब्दिक घुमाव की त्रुटि दूर हो जाती है।।८३।।

यदि आपको उत्तर नहीं आता तो ठेठ गप्प मत मारिए। ठेठ गप्प का एक उदाहरण इस प्रकार है-
अच्छी नागरिकता पर एक विद्यार्थि ने लिखा-
१.अच्छी नागरिकता से रहना चाहिए।
२.अच्छी नागरिकता से व्यवहार करना चाहिए।
३.अच्छी नागरिकता से सड़क पर चलना चाहिए।
४.अच्छी नागरिकता से समाज में रहना चाहिए आदि।
परीक्षार्थी को ऋण दो नंबर मिले।।८४।।

उपरोक्त आधार पर ही सही गप्प इस प्रकार बनाई जा सकती है-
१.नगर में रहने वाले को नागरिक कहते हैं।
२.नागरिक से नागरिकता शब्द बना है।
३.नगर नियमों के नियमों का पालन नागरिकता है।
४.सड़क नियमों का पालन सबको लाभप्रद है।
५.अच्छा व्यवहार करना नागरिक का गुण है।
६.समाज व्यवस्था का अनुपालन उत्तम है।
७.क्रमांक ३,४,५,६ आदि सबका पालन अच्छी नागरिकता है।।८५।।

स्मरण रहे शब्द चयन शैली अर्थ बदल देती है- अर्थ बदल जाने से अंक बदल जाते हैं।।८६।।

हर प्रश्न के अंत में ‘‘नवीन खोज’’ या ‘‘इस क्षेत्र का कल का ज्ञान’’ या ‘‘नवचिन्तन’’ या ‘‘संस्कृति चिन्तन’’ आदि टिप्पणी जरूर दें।।८७।।

प्रश्न की समाप्ति सार संक्षेप से करें। इसमें अचानक याद आ गया नया तथ्य भी जोड़ सकते हैं।।८८।।

निबंध शैली के प्रश्नों के उत्तर खंड, उप खंड, प्रति उपखंडों के साथ-साथ छोटे-छोटे पैराग्राफों में दें।।८९।।

उत्तर न आने वाले प्रश्न को सबसे अन्त में हल करें। इसका उत्तर लिखते समय मात्र प्वाइंट ही लिखें। उनमें नंबर जरूर डाल दें। खंड, उपखंड बांट सके तो बेहतर है।।९०।।
घसीटा न लिखें। साफ स्वच्छ लिखें। उत्तर देते समय निरर्थक न लिखें। उत्तर का कलेवर जबर्दस्ती न बढ़ाएं।।९१।।

परीक्षा देना पढ़ने से भी अधिक सूक्ष्म तकनीक है। वर्तमान परीक्षा ज्ञान कसौटि करीब साठ सत्तर प्रतिशत है। शेष व्यवहार कसौटि है। प्रस्तुतिकरण कसौटि है।।९२।।

समय बचे रहने पर भी यदि अंतिम प्रश्न तुम्हें नहीं आता है तो उस प्रश्न को प्वाइंट मात्र लिख कर हल करो। आखिर में उसे अधूरा छोड़ दो ताकि परीक्षक समझे कि परीक्षार्थी को समय नहीं मिला।।९३।।

पांच सात मिनट जो समय बचा है उसमें एक लाल पेंसिल से या स्याही से समस्त खंड, शीर्षक, उपशीर्षक रेखांकित कर दें।।९४।।

भूलो मत- आठ पेज के उत्तर से साढ़े तीन पेज का उत्तर बेहतर है।।९५।।

यह भी मत भूलो कि डेढ़ दो पेज के उत्तर से भी तीन साढ़े तीन पेज का उत्तर बेहतर है।।९६।।

यदि आपको कोई उत्तर ठीक-ठीक आता है पर उसका विवरण कम उपलब्ध है तो पहले उसके प्वाइंट या शीर्षक उपशीर्षक लिखें। फिर उन्हें एकेक करके हेडिंग देकर विस्तार करें।।९७।।

समय से ज्यादा प्रश्न का उत्तर लिखने के लालच से बचें। ज्यादा जानने की स्थिति में सही और सटीक मात्र ही लिखें। कलेवर से विषयवस्तु महत्वपूर्ण है।।९८।।

ख्याल रखें- एक प्रश्न का उत्तर अति लम्बा लिखने से औसतः दो प्रश्न समुचित समय में पूरे कर लेना अधिक अंक दिलाता है।।९९।।

पानी ताप संतुलन करता है। पानी आवेग संतुलन करता है। परीक्षा दौरान दो बार एकेक गिलास पानी अवश्य पीएं।।१००।।

दिमाग आपके पास है आपके हाथ में है। चिट आदि आपके बाहर है। हाथ की चिड़िया झाड़ी की छिपी चिड़िया से हमेशा बेहतर होती है।।१०१।।

साक्षर जो पढ़ता है जीता है।
नाक्षर जो पढ़ता है रौंदता है- सिगरेटची या शराबी।
आक्षर जो सुनता है जीता है।
तुम साक्षर हो।

आंखन देखी वो रस्ता है जो
कागद लेखी की समझ देता है।

आपने तैयारी कर परीक्षा दी।
आप सतयुग रहे।
आप पास हो गए हैं।
(आगामी रचना ‘साक्षात्कार गुर’ पढ़ें।)

डॉ.त्रिलोकीनाथ क्षत्रिय
पी.एच.डी. (दर्शन – वैदिक आचार मीमांसा का समालोचनात्मक अध्ययन), एम.ए. (दर्शन, संस्कृत, समाजशास्त्र, हिन्दी, राजनीति, इतिहास, अर्थशास्त्र तथा लोक प्रशासन), बी.ई. (सिविल), एल.एल.बी., डी.एच.बी., पी.जी.डी.एच.ई., एम.आई.ई., आर.एम.पी. (१०७५२)

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