दिनेश चन्द्र गुप्ता

7 जुलाई भारतमाता को दासता की बेड़ियों से मुक्त कराने के संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर बलिदानी दिनेश चन्द्र गुप्ता का बलिदान दिवस है| उनका जन्म वर्तमान बंगलादेश के मुंशीगंज जिले के जोशोलोंग में 6 दिसंबर 1911 को हुआ था| ढाका कालेज में अध्ययन के दौरान वो 1928 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन के समय नेता जी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा बनाये गए समूह बंगाल वालियंटर में शामिल हो गए | शीघ्र ही इस समूह ने स्वयं को एक सक्रिय विप्लवी संगठन में परिवर्तित कर लिया जिसका लक्ष्य था कुख्यात ब्रिटिश पुलिस अधिकारीयों का सफाया|

इसी अवधि में दिनेश गुप्ता ने मिदनापुर के स्थानीय क्रांतिकारियों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया जो लगातार तीन जिलाधिकारियों डगलस, बर्जे और पेडी के वध के कारक बने| कालक्रम में संगठन ने जेलों में भारतीय कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार करने वाले इन्स्पेक्टर जनरल ऑफ़ प्रिजन एन.एस. सिप्सन की हत्या का निश्चय किया| निश्चय ना केवल उसकी हत्या का था बल्कि कलकत्ता के डलहौजी स्क्यूयर में स्थित सेकेट्रीएट बिल्डिंग राइटर्स बिल्डिंग पर हमला कर ब्रिटिश अधिकारियों के दिलों में भय उत्पन्न करने का भी था| ]

8 दिसंबर 1930 को यूरोपियन लिबास में दिनेश अपने साथियों विनय बसु और बादल गुप्ता के साथ राइटर्स बिल्डिंग में प्रवेश कर गए और सिम्पसन को मार गिराया| फिर क्या था, ब्रिटिश पुलिस और तीन युवा क्रांतिकारियों में गोलीबारी शुरू हो गयी जिसमें कई अन्य अधिकारी भी गंभीर रूप से घायल हुए| लम्बे संघर्ष के बाद पुलिस उन पर हावी होने लगी| गिरफ्तार ना होने की इच्छा के चलते बादल गुप्ता ने पोटेशियम साइनाइड खा लिया जबकि विनय और दिनेश ने अपनी ही रिवाल्वार्स से खुद को गोली मार ली|

दोनों को अस्पताल ले जाया गया जहाँ विनय की 13 दिसंबर 1930 को मृत्यु हो गयी पर दिनेश को बचा लिया गया| उन पर मुकदमा चला कर उन्हें मौत की सजा सुनाई गयी और 7 जुलाई 1931 को 19 वर्ष की आयु में उन्हें अलीपुर जेल में फांसी दे दी गयी| इन तीनों की शहादत ने कितने ही दिलों को झझकोरा और क्रांति का ये कारवां आगे बढ़ता गया|

स्वतंत्रता के बाद दिनेश और उनके साथियों विनय और बादल की स्मृति को अक्षुण रखने के लिए डलहौजी स्क्यूयर का नाम बदल कर इनके नाम पार कर दिया गया और आज इसे बी.बी.डी.बाग़ (बेनोय-बादल-दिनेश बाग़) कहा जाता है| ऐसे अमर बलिदानी दिनेश चन्द्र गुप्ता को उनके बलिदान दिवस पर कोटि कोटि नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि|

~ लेखक : विशाल अग्रवाल
~ चित्र : माधुरी

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