घेरों को घेर दो उन्मुक्त हो ही जाओगे..!!

एषणा सबसे बड़ा घेरा है। एषणाओं में वित्तेषणा, पुत्तेषणा, यशेषणा के त्रि हैं। त्रि एषणाओं के घेरे को घेरना उन्मुक्ति का पहला चरण है। वर्तमान धर्म जो वास्तव में सम्प्रदाय मात्र रह गए हैं मानव की बुद्धि पर इस्पात कटीले शिकंजे हैं। जिसमें मानव अस्तित्व कसमसा कराह रहा है। इन धर्म सम्प्रदायों से भी संकीर्ण कठोर शिकंजे हैं राजनैतिक दलों के। वर्तमान प्रजातन्त्र व्यवस्था में दबाव समूहों के जिनका आदमी अंग होता है की लघु-लघु संकरी कोठरियां भी आदमी को उन्मुक्ति की सांस नहीं लेनें दे रहीं हैं।
इतने घेरों से हटकर स्वयं ओढ़े घेरे भी हैं आदमी के लिए। इन्हें आदमी बड़े चाव से ओढ़ता है। इन घेरों को घेरने का साधन है आदमी का बड़ा होते जाना। ज्ञान वह साधन है जो समस्त घेरों से मानव को उन्मुक्त करता है।
ज्ञान-यात्रा का एक विकास है ‘‘घेरों को घेर दो उन्मुक्त हो ही जाओगे’’।
डॉ. त्रिलोकीनाथ क्षत्रिय
पी. एच. डी. (वेद), एम. ए. (आठ विषय),
सत्यार्थ शास्त्री, बी. ई., एल. एल. बी.,
डी. एच. बी., पी. जी. डी. एच. ई.,
एम. आई. ई., आर. एम. पी. (10752)
बी 512, सड़क-4, स्मृतिनगर, भिलाई नगर,
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