“कदम ताल सम्हल, सम्हाल”

मेरा सात साल का लड़का नमित रात डायनिंग टेबल पर हंसते हंसते दिन की घटना जताता है । ”मैं फुटबाल खेल रहा था । संतोष गोली था । मैंने किक मारी । जमीन गीली थी और संतोष धड़ाम से गिरा और गोल हो गया ।“ गीली जमीन चलने-दौड़ने की स्थिति में खतरनाक होती है । मैंने कहा तथा नमित को बताया कि तनजानिया में मैं भी ऐसे ही गिरा था और मेरे दाहिने हाथ की हड्डी टूट गई थी ।

औसत आदमी प्रतिदिन 18000 कदम चलता है । सामान्य आदमी को वर्ष में करीब पांच लाख कदम चलना पड़ता है । सामान्य प्रति दस लाख कदम चलने पर एक बार फिसलकर चोट लगने की संभावना रहती है । सामान्य व्यक्ति को वर्ष में पांच बार फिसलकर चोट लग सकती है । नशे की स्थिति में यह संभावना नशे की मात्रा के अनुसार बढ़ जाती है ।

निर्माण का कार्य करने वाले श्रमिक प्रतिदिन सामान्य आदमी से करीब दुगुना चलता है अर्थात् वह प्रतिदिवस करीब 36000 कदम चलता है । वर्तमान संयंत्र के अंदर निर्माण के कार्यों में सामान्य से करीब छः गुनी खतरनाक स्थितियां होती हैं । निर्माण कार्य में श्रमिक की 1ः66 लाख कदम चलने पर एक बार फिसलकर गिरने की संभावना रहती है । एक सौ बीस दिवस के शट डाउन कार्य में (औसत बड़ा शट डाउन कार्य 120 दिन का होता है ।) हर निर्माण श्रमिक 4320000 कदम चलेगा । अतः उसकी फिसलकर गिरने की संभावना करीब 25 बार की होती है ।

निर्माण कार्य में श्रमिकों को सकरी मिट्टी कटी सीढ़ियों पर, रेत के बोरों से बनी सीढियां, बिना पक्की रेलिंग की सीढियों, बिखरी छड़ों के बीच, उबड़ खाबड़ रास्तों से, खुदे गड्डों के मध्य, लटक मारी के साथ, लौह छड़ ढांचों से ऊपर, स्ट्रक्चरों के मध्य, रेलपातों के मध्य, चलते तार गुच्छों के मध्य, गिट्टी, रेत, खुदी मिट्टी पर, टनलों के बीच से और स्क्रैप टुकड़ों के मध्यादि चलना पड़ता है । यही कारण है कि कई श्रमिक फिसलकर गिरने से दुर्घटना ग्रस्त हुए हैं ।

वर्तमान में हुई कुछ दुर्घटनाएं इस प्रकार हैं । 10 के निर्माण कार्य में दिनांक 15.3.94 को श्रीमती कुम्हारी बाई दीवार पार की मिट्टी खिसकने पर मिट्टी भरे समेत भागते समय उबड़ खाबड़ रास्ते के कारण गिर पड़ीं और बेहोश हो गई । मेन मेडिकल पोस्ट पर सामान्य उपचार पश्चात उन्हें छुट्टी दे दी गई ।

श्रीमती धनेश्वरी दिनांक 2.5.94 करीब प्रातः 8 बजे एक पत्थर का टुकड़ा ले जाते समय मिट्टी की सीढ़ी चढ़ते समय एक मीटर ऊँचाई से गिर पड़ीं । उनके हाथ में चोट लगी । श्री चक्रधर लाल हैल्पर भोजन करने के लिए कार्य स्थल से निकल रहे थे कि अचानक शटनिंग प्लेटों के मध्य उनका पैर फिसल गया । सम्हलते सम्हलते उनका हाथ पास में रखे चलते टेबल फैन के पंखे से टकरा गया । उनकी दो ऊंगलियों के पोर पंखें की चपेट में आ गए । अतः कृपया सावधान रहें:

1) हर निर्माण कर्मचारी वर्ष में 75 बार फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है ।
2) फिसलन पैर और सतह के मध्य कम घर्षण रह जाने के कारण होती है ।
3) आगे बढ़ने या पीछे हटने पर किसी वस्तु से टकराने पर भी गिरने की सम्भावना होती है ।
4) कटे पाइप के टुकड़े धड़ाम से गिरने के कारण होते हैं ।
5) गिरना गुरुत्व भार केन्द्र के आधार तल के बाहर होने के कारण होता है ।
6) फर्श, सड़क, प्लेटों आदि पर पानी मिश्र तेल फिसलने के लिये अत्याधिक खतरनाक स्थिति पैदा करते हैं ।

उपरोक्त से बचने के लिए:
1) संतुलन बनाये रखें ।
2) आस पास ऊपर नीचे की परिस्थितियों के प्रति जागरूक हों ।
3) कार्य करते समय कार्य क्षेत्र उबड़, खाबड़ होने से बचाने का प्रयास करें ।
4) कटे पाईपों, कटे लौह छड़ों के टुकड़ों को इधर उधर छितरायें नहीं ।
5) गृह व्यवस्था सुधारें ।
6) पथ अवरोध फौरन हटाएं ।
7) चिकनाहट भरे तल साफ रखें । उन पर तेल, बुरादा डालें ।

कदम ताल,
सम्हल सम्हाल ।
हर एक कदम,
सीधी हो चाल ।

स्व. डॉ. त्रिलोकीनाथ जी क्षत्रिय
पी.एच.डी. (दर्शन – वैदिक आचार मीमांसा का समालोचनात्मक अध्ययन), एम.ए. (आठ विषय = दर्शन, संस्कृत, समाजशास्त्र, हिन्दी, राजनीति, इतिहास, अर्थशास्त्र तथा लोक प्रशासन), बी.ई. (सिविल), एल.एल.बी., डी.एच.बी., पी.जी.डी.एच.ई., एम.आई.ई., आर.एम.पी. (10752)

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