अनुवाद कला (प्रथम अंश) अभ्यास 31

(संख्या वचन)

१. इस कक्षा में इकसठ लड़के हैं, जिनमें उन्नीस उत्तम कोटि के हैं, पन्द्रह मध्यम कोटि के और सत्ताईस अधम कोटि के हैं।
अस्यां श्रेण्यामेकषष्टिश्छात्राः। येषु नवदशोत्तमकोटयः, पञ्चदश मध्यमकोटयः, सप्तविंशतिश्चाधमकोटयः सन्ति।

२. अड़तालीस में बत्तीस जोड़ने से अस्सी होते हैं और एक सौ दस में से पचास निकालने से शेष साठ रहते हैं।
अष्टाचत्वारिंशता सम्पिण्डिता द्वात्रिंशदशीतिर्भवति। दशशताद् व्यवलितायां पञ्चाशति षष्टिरवशिष्यते।

३. दस हजार पांचसौ बासठ को आठ सौ चौवन से गुणा करो और एक अरब पच्चीस करोड़ बाईस लाख बयासी हजार नौ सौ बत्तीस को तैंतीस लाख पिच्यासी हजार सात सौ छप्पन से बाँटो।
दश सहस्राणि पञ्च शतानि द्विषष्टिं चाष्टाभिः शतैश्चतुष्पञ्चाशता च जहि। एकमर्बुदं पञ्चविंशतिं कोटी द्वाविंशतिं लक्षाणि द्व्यशीतिं सहस्राणि नव शतानि द्वात्रिशतं च त्रयस्त्रिंशता लक्षैः पञ्चाशता सहस्रैः सप्तभिः शतैः षट्पञ्चाशता च विभज।

४. ऋग्वेद की इक्कीस शाखाएँ हैं, यजुर्वेद की एक सौ एक, सामवेद की हजार और अथर्ववेद की नौ। कुल मिलाकर ग्यारहसौ सत्ताईस होती हैं।
एकशतमध्वर्युशाखाः, सहस्रवर्त्मा सामवेदः, एकविंशतिधा बाह्वृच्यं, नवधाऽथर्वणो वेदश्च। सकलमिदमेकादश शतान्येकत्रिंशच्च भवति।

५. विक्रम संवत २००४ में भारतवर्ष की सदियों की खोई हुई स्वतन्त्रता फिर प्राप्त हुई। यह दिन इस देश के इतिहास में सुनहरी अक्षरों में लिखा जाएगा।
विक्रम-वत्सराणां चतुरुत्तरे सहस्रद्वये गते शताब्दीर्विलुप्ते भरतवर्षस्वातन्त्र्यं प्रतिलब्धम्। अयं सुदिवस एतद्देशेतिहासपत्रेषु कार्तस्वररसेन न्यस्ताक्षरो भविष्यति।

६. कल हमारे विद्यालय का पारितोषिक वितरण उत्सव था। भिन्न भिन्न श्रेणियों के कुल पचहत्तर छात्रों को पारितोषिक बाँटे गए।
गतेऽहन्यस्मदीये विद्यालये पारितोषिकवितरणोत्सवोऽभूत्। नाना श्रेणीनां पञ्चसप्ततये छात्रेभ्यः पारितोषिकाणि वितीर्णानि।

७. विभाजन के पश्चात् इस देश की आबादी पैंतीस करोड़ के लगभग है। सन् १९४९ में नई जनगणना होगी।
विभक्तेरुत्तरमत्र पञ्चत्रिंशत् कोटयो जनाः। पञ्चत्रिंशत् कोटयो वा जात्यानाम्। एकोनपञ्चाशदुत्तरनवशत्युत्तरसहस्रतमे ख्रिस्ताब्दे भूयो जनसंख्यानं भविता।

८. हजारों कुलनारियाँ भारत की स्वतन्त्रता के लिए हँसती हँसती जेल में गईं।
सहस्रशः कुलाङ्गना भारतवर्षस्य स्वाधीनतायै प्रहसन्त्यः कारागारं प्रविष्टाः।

९. मेरे पास चार हजार पन्द्रह स्वर्ण मुद्राएँ हैं और मेरे भाई के पास एक हजार पन्द्रह।
मम चत्वारि सहस्राणि पञ्चदश च स्वर्णमुद्राः सन्ति। भ्रातुश्च पञ्चदशसहस्रम्।

१०. दो कोड़ी बर्तन कलई कराये गए और इसपर साढ़ेपाँच रुपए खर्च आए।
द्वे विंशती पात्राणां त्रपुलेपं लम्भिते। सार्धपञ्च रुप्यकाणि च व्ययीकृतानि।

संकेतः-
१. अस्यां श्रेण्यामेकषष्टिश्छात्राः। विंशति से नव नवति तक के संख्यावचन स्त्रीलिङ्ग हैं और एकवचन में प्रयुक्त होते हैं, संख्येय का लिङ्ग और वचन चाहे कुछ भी हो
२. अष्टाचत्वारिंशता सम्पिण्डिता (संहिता, युता, संकलिता) द्वात्रिंशदशीतिर्भवति। दशशताद् व्यवलितायां (विद्युतायां, शोधितायाम्) पञ्चाशति षष्टिरवशिष्यते (षष्टिरुर्वरिता भवति) दशशतम् = दशाधिकं शतम् = एक सौ दस न कि दस सौ। यदि दस सौ कहना हो तो समास के रूप में ‘दशशती’ कहना पड़ेगा और समास न करते हुए ‘दशशतानि’। इसी प्रकार पञ्चदशसहस्रम् = एक हजार पन्द्रह। दशान्त से ‘ड’ तद्धित करके एकादशं शतम्, एकादशं सहस्रम् (१११, १०११) ऐसा भी कह सकते हैं। केवल ‘दशन्’ से ‘ड’ नहीं होता। तदस्मिन्नधिकमिति दशान्ताड् डः (अष्टा. ५/२/६५)
३. दश सहस्राणि पञ्च शतानि द्विषष्टिं चाष्टाभिः शतैश्चतुष्पञ्चाशता च जहि (गुणय)। इस अर्थ में अभि-अस् का प्रयोग इस प्रकार होता है- “अयुतं दशकृत्वोऽभ्यस्तं नियुतं भवति” (निरुक्त) अयुत को दस गुणा किया जाय तो नियुत हो जाता है।
४. एक सौ एक = एकशतम्।
५. विक्रम-वत्सराणां चतुरुत्तरे सहस्रद्वये गते (विक्रमतश्चतुरुत्तरयोद्वयोर्वर्षसहस्रयोर्गतयोः) शताब्दिर्विलुप्तं भरतवर्षस्वातन्त्र्यं प्रतिलब्धम्- यहाँ समास करके चतुरुत्तरद्विसहस्रतमे (विक्रमवत्सरे) नहीं कह सकते
५. यह दिन इस देश के इतिहास में सुनहरी अक्षरों में लिखा जाएगा = अयं सुदिवस एतद्देशेतिहासपत्रेषु कार्तस्वररसेन न्यस्ताक्षरो भविष्यति।
६. पचहत्तर छात्रों को = पञ्चसप्ततये छात्रेभ्यः।
७. विभक्तेरुत्तरमत्र पञ्चत्रिंशत् कोटयो जनाः। पञ्चत्रिंशत् कोटयो वा जात्यानाम्। एकोनपञ्चाशदुत्तरनवशत्युत्तरसहस्रतमे ख्रिस्ताब्दे (..उत्तरे ख्रिस्ताब्दसहस्रे गते) भूयो जनसंख्यानं भविता। यहाँ प्रायः ..नवशतोत्तर.. ऐसा प्रयोग करते हैं, सो निश्चय ही प्रमाद है। कारण कि अकारान्तोत्तरपद समाहार द्विगु होने में द्विगोः (अष्टा. ४/२/२२) से ङीप् अपरिहार्य है।
८. हजारों कुलनारियाँ = सहस्राणि कुलाङ्गनाः, कुलाङ्गनासहस्राणि, सहस्रशः कुलाङ्गनाः। ‘परस्सहस्राः’ का यहाँ प्रयोग उचित न होगा, क्योंकि इसका अर्थ “एक हजार से ऊपर है” हजारों नहीं।
९. मम चत्वारि सहस्राणि पञ्चदश च स्वर्णमुद्राः सन्ति (मम पञ्चदशाधिकानि चत्वारि स्वर्णमुद्रासहस्राणि सन्ति)।
१०. द्वे विंशती पात्राणां त्रपुलेपं लम्भिते। यह ‘विंशति’ संख्यामात्र में व्यवहृत हुआ है, संख्येय में नहीं। अतः अर्थ के अनुसार द्विवचन में भी प्रयुक्त हुआ। इसी प्रकार बहुवचन में भी प्रयोग होगा- तिस्रो विंशतयः पात्राणाम् इत्यादि।

अनुवाद कला मूल लेखक: आचार्य चारुदेव शास्त्री
अनुवाद सुश्री दीक्षा (आर्यवन आर्ष कन्या गुरुकुल, रोजड़, गुजरात)
टंकन प्रस्तुति: ब्र. अरुणकुमार “आर्यवीर ”, आर्ष शोध संस्थान, अलियाबाद तेलंगाना।

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