अनुवाद कला (प्रथम अंश) अभ्यास 21

(उकारान्त नपुंसकलिङ्ग)

१. शहद (मधु) श्लेष्मा को दूर करता है और और घी पित्त को।
श्लेष्मघ्नं मधु। पित्तघ्नं घृतम्।

२. माँ मुझे जल (अम्बु) दो। मेरा गला प्यास से सूखा जाता है।
अम्ब ! देहि मेऽम्बु। तृषया परिशुष्यति मे कण्ठः।

३. देवदत्त का पिता बड़ा क्रोधी है, वह मामूली सी भूलों को भी क्षमा नहीं करता।
देवदत्तस्य तातोऽस्त्यन्तममर्षणः। न ह्यण्वपि स्खलितं क्षम्यते तेन।

४. मारे गरमी के मेरी जीभ तालु (तालु) से चिपटी जा रही है। मुझे जल्दी से पानी दो।
ऊष्मातिरेकाज्जिह्वा मे सजति तालुनि। क्षिप्रं जलं देहि।

५. ये खिलौने लकड़ी (दारु) के नहीं, ये तो अग्निदाह्य लाख (जतु) के हैं।
नेमे दारुणो विकारा अलङ्काराः, वह्निभोज्यस्य जतुन इमे भवन्ति।

६. ह धन (वसु) का स्वामी होता हुआ भी निर्धन की तरह कठिनता से निर्वाह करता है।
वसुपतिरपि सन्नयमकिञ्चन इव कृच्छ्रेण निर्वहति।

७. हम लोगों को नए घर बनाने हैं, अतः ऊँची खुली, समतल भूमि (वास्तु) चाहिए।
नवानि निकेतनानि निर्मातुमना वयं स्मः। अतोऽसंवृत्तमुत्तुङ्गं तथा च समं वास्तु वाञ्छामः।

८. बहुत लोग भोजन आच्छादन (कशिपु) का प्रबन्ध भी नहीं कर पाते, दूसरी साधन सामग्री का तो क्या कहना ?
कशिपुनोऽप्यनीशा बहवः किमुतान्यस्योपकरणजातस्य ?

९. कच्चे (शलाटु) फल खाए हुए कई बार पेट में शूल उत्पन्न कर देते हैं, पर सुखाए हुए (ान) फल हानि नहीं करते।
शलाटूनि फलानि भक्षिते सति जनयन्त्युदरशूलम्। नीरसीकृतानि तु फलानि नोत्पादयन्ति दूषणम्।

१०. कोई लोग खुशामद (चाटु) पसन्द करते हैं, दूसरे नहीं। रुचियाँ भिन्न भिन्न होती हैं।
केचन खलु भवन्ति चाटुप्रियाः, नेतरे। रुचीणां भेदात्।

११. यह कुछ चीज (स्तु) है और यह कुछ भी नहीं (अस्तु), इस बात का परिचय तुम्हें इसका प्रयोग करने पर होगा।
अस्तीदं किञ्चिद् वस्तु, इदं चावस्तु। प्रयुज्यैवैतदभिज्ञास्यसीदम्।

संकेतः-
१. श्लेष्मघ्नं मधु। पित्तघ्नं घृतम्।
२. अम्ब ! देहि मेऽम्बु। तृषया परिशुष्यति मे कण्ठः।
३. क्रोधन, अमर्षण-वि.। तनु, अणु-वि.। स्खलित-नपुं.।
४. सजति।
५. नेमे दारुणो विकारा अलङ्काराः, वह्निभोज्यस्य जतुन इमे भवन्ति।
८. कशिपुनोऽप्यनीशा बहवः किमुतान्यस्योपकरणजातस्य ?

अनुवाद कला मूल लेखक: आचार्य चारुदेव शास्त्री
अनुवाद सुश्री दीक्षा (आर्यवन आर्ष कन्या गुरुकुल, रोजड़, गुजरात)
टंकन प्रस्तुति: ब्र. अरुणकुमार “आर्यवीर ”, आर्ष शोध संस्थान, अलियाबाद तेलंगाना।

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