अनुवाद कला (द्वितीय अंश) अभ्यास 15

(लङ् लकार)

१. कुमारी मोहिनी का गीत समाप्त ही हुआ था कि उपस्थित लोगों ने कहा- “एक बार और” “एक बार और”।
कुमार्या मोहिन्या गीतेश्वसाने संनिहिता जना भूयोऽपीति साम्रेडम् आचक्षत।

२. आधी रात को सम्बन्धियों से बातें करते करते रोगी ने दम तोड़ दिया।
निशीथे सगन्धैः सह संलपन् रूजार्त्तः प्राणानमुञ्चत्।

३. वह परीक्षा के दिनों में दस बारह घण्टे काम किया करता था तो भी नहीं थकता था।
परीक्षादिनेषु दशद्वादशा होरा उद्यमे संलग्नोऽपि स न व्यक्लाम्यत्।

४. जब मैं पाठशाला गया तो छुट्टी का घण्टा बज रहा था। लड़के कमरों से भागे-भागे बाहिर आ रहे थे। कोई चीखता था, कोई सीटी बजाता था और कोई खुशी के मारे फूला नहीं समाता था।
मयि पाठशालां गतेऽनध्यायघण्टा निनदति स्म। बाला प्रकोष्ठेभ्यो धावित्वा बहिरागच्छन्ति स्म। कश्चिच्चीत्कारशब्दमकरोत्। कश्चिच्छीश्शब्दमकरोत्। अपरः प्रमदेन परवानासीत्।

५. हिरन छलांगे मारता हुआ मैदान के पार निकल गया।
उत्प्लवमानो मृगः क्षेत्रस्य पारं निर्ययौ।

६. वह लड़खड़ाता हुआ चट्टान के नीचे औंधे मुंह गिर पड़ा और उसका अंग अंग टूट गया।
प्रस्खलन्नसौ ग्राव्णोऽवमूर्धाऽधोऽपतत्, अङ्गमङ्गं चाध्यगच्छत्।

७. यह वह कहानी है जो दस वर्ष पहले मैंने सुनी थी।
सैवेयं कथा यामितो वर्षदशकेऽशृणवम्।

८. पक्षी आकाश में इतना ऊँचा उड़ गया कि देखते ही देखते आँखों से ओझल हो गया।
विहङ्मो विहायस्येवमुच्चैरुदडयत यत्प्रत्यक्षमीक्ष्यमाणोऽपि परोक्षोऽभवत्।

९. राजपूत ऐसी वीरता से लड़े कि उन्होंने शत्रु के छक्के छुड़ा दिए।
क्षत्रिया एवं वीर्येणायुध्यन्त यदरीन्

१०. सन्तरों को देखते ही उसके मुँह में पानी भर आया।
नारङ्गाणि दृष्ट्वैव स तेषु भृशमलुभ्यत्।

११. वर्तमान विश्वव्यापी युद्ध आरम्भ ही हुआ था कि दूकानदारों ने प्रत्येक वस्तु की कीमत दुगुनी क्या चौगुनी से अधिक कर दी।

सद्यो विश्वव्यापियुद्धारम्भे सत्येव विपणिनः प्रतिवस्तुमूल्यं नैव द्विगुणम् अपितु चतुर्गुणतोऽप्यधिकम् आर्घयन्।

१२. वह बहती नदी में कूद पड़ा और डूबते बच्चे को बाहर निकाल लाया।
स वहन्त्यां वाहिन्याम् अप्लवन्त, आप्लूयमानं च बालम् उदतारयत्।

१३. पिता अपने इकलौते पुत्र की हत्या का समाचार सुनकर हक्का बक्का रह गया और लम्बी चिन्ता में पड़ गया।
हतो ममैकस्तनूज इति वृत्तमुपलभ्य पिता विस्मयेन विधेयीकृतश्चिन्तासन्तानैकतानोऽभवत्।

१४. उसने चित्र उलटा लटका दिया।
स चित्रं विपरीतम् अवालम्बत।

संकेतः-
२. आधी रात को = निशीथ, अर्धरात्र पुं.। दम तोड़ दिया = प्राणानमुञ्चत्।
३. दस बारह घण्टे = दशद्वादशा होराः (द्वितीया)।
४. छुट्टी का घण्टा = अनध्यायघण्टा। कोई चीखता था = चीत्कारशब्दमकरोत्। कोई सीटी बजाता था = शीशूशब्दमकुरुत। खुशी के मारे फूला नहीं समा रहा था = प्रमदेन परवानासीत्।
५. छलाँगे मारता हुआ = प्लवमानः। मैदान के पार निकल गया = निकर्षणमत्यक्रामत्।
७. दस वर्ष पहले मैंने सुनी थी = यामितो वर्षदशकेऽशृणवम्।
९. छक्के छुड़ा दिए = अरीन्हतोत्साहान् व्यदधुः।
१०. स तेषु भृशमलुभ्यत्, तस्य दन्तोदकसंप्लवोऽभूत्।

अनुवाद कला मूल लेखक: आचार्य चारुदेव शास्त्री
अनुवाद सुश्री दीक्षा (आर्यवन आर्ष कन्या गुरुकुल, रोजड़, गुजरात)
टंकन प्रस्तुति: ब्र. अरुणकुमार “आर्यवीर ”, आर्ष शोध संस्थान, अलियाबाद तेलंगाना।

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