अनुवाद कला (द्वितीय अंश) अभ्यास 10

(लँङ् लकारः)

१. जब माता दृष्टि से ओझल हुई, तो बच्चा बिलख बिलख कर रोने लगा।
नयनविषयम् अतिक्रान्तायां मातरि शिशुः प्रमुक्तकण्ठं प्रारोदीत्।

२. जब मैं स्कूल पहुँचा तो अध्यापक महोदय उपस्थिति ले रहे थे।
यदाहं पाठालयमाप्नवं तदा गुरुचरणा नामावलेर्विशब्दने व्यापृता अभवन्।

३. जब आप का नौकर मुझे बुलाने आया तो मेरे सिर में अत्यधिक पीड़ा हो रही थी, इसलिए मैं आपकी सेवा में नहीं आ सका।
यावदत्रभवतः परिचारको मामाह्वातुमुपानमद् तावत् तीव्रया शीर्षवेदनया पीडित आसम्, अत एवात्रभवत उपस्थातुं नापारयम्।

४. जब हम रेलगाड़ी से उतरे तो हमारा नौकर मेज पर कलेवा रख रहा था।
अस्मासु रेलयानादवतीर्णेष्वस्मन्नियोज्यः कल्यवर्तम् आहारफलकेऽचरयत्।

५. वह अपने मित्र से उसके पिता के मृत्यु के बाद नहीं मिला, इसलिए उसे क्या मालूम कि उसपर क्या क्या आपत्तियाँ आईं।
मित्रस्य पितुर्मरणानन्तरं स नन्नामेलित्, अतोऽनभिज्ञोऽयं तदापतितानाम् आपदाम्।

६. कछुआ धीरे धीरे चलकर खरगोश से पहले नियत स्थान पर जा पहुँचा।
कूर्मश्चोपित्वा शशात् प्राङ् नियतस्थानं प्रापत्।

७. क्या तुम्हारे पहुँचने से पहले इन्स्पेक्टर महोदय आठवीं कक्षा का निरीक्षण कर चुके थे?
अपि त्वदागमनात्पूर्वं निरीक्षकमहाभागोऽष्टमीं श्रेणीं परिक्षितवान् आसीत्।

८. जब आप पन्द्रह वर्ष के थे तो क्या आपने नवम श्रेणी पास कर ली थी?
किं भवान् पञ्चदश वर्ष आसीत् तदानीं नवमीं श्रेणीम् उत्तीर्णवान् आसीत्?

९. आग बुझानेवाले इंजन के आने से पहले उसका मकान जलकर राख हो गया था।
अग्न्युपशमनयन्त्रस्यागमनात् पूर्वं सन्दीप्तमस्य गृहं भस्मचयोऽभवत्।

१०. पन्द्रह दिन से डॉ. मेरी बहन की चिकित्सा कर रहा था। तब हमने उसे बदल दिया।
यदा भिषङ् मे सोदार्यां पञ्चदश दिवसांश्चिकित्सितवानासीत्, तदा तम्पर्यवर्त्तयाम।

११. इस स्कूल में प्रविष्ट होने से पहले देवदत्त गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ता था।
अत्र विद्यालये प्रवेशात् प्राग् देवदत्तो वर्षत्रयं राजकीयविद्यालयेऽपठत्।

१२. पुलिस के घटना स्थल पर पहुंचने से पूर्व बलवा करने वाले आध घण्टे से दुकानों को आग लगा रहे थे।
रक्षापुरुषाणां व्यतिकरप्रदेशप्रापणात् पूर्वं तुमुलकारिणोऽर्धहोराम् आपणेष्वग्निमददुः।

१३. सूर्य के निकलने से पूर्व वह दस मील चल चुका था।
भानूद्गमात्पूर्वं स दश क्रोशार्द्धान् चलितवान् आसीत्।

१४. जब राजकुमार संसार का चक्कर लगाकर घर पहुँचा तो उसके पिता का राज्याभिषेक हो चुका था।
यदा राजपुत्रः संसारं परिभ्रम्य गेहं प्रापत्तदा तज्जनको राज्याभिषिका आसीत्।

संकेतः-
३. यावदत्रभवतः परिचारको मामाह्वातुमुपानमद् तावत् तीव्रया शीर्षवेदनया पीडित आसम्, अत एवात्रभवत उपस्थातुं नापारयम्। भूतकाल की जब दो क्रियाएँ दो भिन्न वाक्यों द्वारा कही जाएँ तो उनमें से पहले होनेवाली क्रिया को कृत् प्रयोग (क्तान्त अथवा क्तवत्वान्त) से प्रकट करना चाहिए। और साथ में अस् वा भू का लङ् लकार का अनुप्रयोग होना चाहिए। दूसरी पीछे होनेवाली क्रिया को शुद्ध लङ् लकार से ही कह देना चाहिए।
६. कछुआ = कूर्म, कच्छप-पुं.। खरगोश = शश।
७. अपि त्वदागमनात्पूर्वं निरीक्षकमहाभागोऽष्टमीं श्रेणीं परिक्षितवान् आसीत्। ऐसे स्थलों में सम्पूर्ण भूत की क्रियाओं को प्रकट करने के लिए धातु से क्तवतु का प्रयोग करना चाहिए। और साथ में अस् वा भू के लङ् लकार का अनुप्रयोग।
८. पन्द्रह वर्ष के थे = पञ्चदशवर्षः, पञ्चदशसंवत्सरीणः, पञ्चदशसांवत्सरिकः।

अनुवाद कला मूल लेखक: आचार्य चारुदेव शास्त्री
अनुवाद सुश्री दीक्षा (आर्यवन आर्ष कन्या गुरुकुल, रोजड़, गुजरात)
टंकन प्रस्तुति: ब्र. अरुणकुमार “आर्यवीर ”, आर्ष शोध संस्थान, अलियाबाद तेलंगाना।

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