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अधर्म्म

३. अधर्म्म – जिसका स्वरूप ईश्वर की आज्ञा को छोड़कर और पक्षपातसहित अन्यायी होके विना परीक्षा करके अपना ही हित करना है, जो अविद्या हठ अभिमान क्रूरतादि दोषयुक्त होने के कारण वेदविद्या से विरुद्ध है, और सब मनुष्यों को छोड़ने योग्य है, वह ‘अधर्म्म’ कहाता है।

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