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Today's Words

Articles Tag: Adhyatma

अश्वत्थ प्रबन्धन

मानव एक ऊर्ध्व जड़ पीपल वृक्ष है। पीपल का संस्कृत नाम अश्वत्थ है। पीपल की पिप्पली खा-खा कर रहनेवाले तथा पीपल वृक्ष के अति ओषजनमय वातायन में साधनारत ऋषि का [ … ]

“सर्वधर्म समभाव-सबको सन्मति दे भगवान”

“हम न केवल विश्व व्यापी सहिष्णुता में विश्वास रखते हैं बल्कि सभी धर्मों को सत्य मानते हैं ।” विवेकानन्द के शिकागों में पहले भाषण का यह अंश सर्व धर्म समभाव [ … ]

ज्ञानविज्ञान का आदिमूल

सत्य विद्या और इससे ज्ञात पदार्थ विद्या का आदि मूल परमेश्वर है। अणोरणीयान- अर्थात् सूक्ष्म से सूक्ष्मतम- भौतिक विज्ञान का, महतो महीयान- अर्थात् महान से महानतम अन्तरिक्ष विज्ञान का, यजन- [ … ]

“तन आत्म ब्रह्म युजन है योग”

”युज“ धातु का अर्थ है युजन या अटूट जोड़ । इससे योग शब्द बनता है । स्पष्ट है जहां युजन नहीं है वहां योग नहीं है । आज के युग [ … ]

आदर्श पुरुष का स्वरूप

प्रत्यय सत्य होता है स्वरूप नकल। नकल में असल ही आधार होता है। इस असल के आधार का प्रतिशत हर नकल में अलग अलग होता है। सुकरात उपरोक्त तथ्य को [ … ]

“गायत्री साधना”

ओ३म् – ब्रह्म पंचेक है ब्रह्म – पंचिकत्वा – पंचेकवान – पंचेकवान – पंचेकथा – पंचेक दा – पंचेक पा – यह मैं – पंचेक भरा – सर्वत्र पवित्र। भूः: [ … ]

“मेधामय”

यां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते। तया मामद्य मेधयाऽग्ने मेधाविनं कुरु।। (यजु.32/14) पृथ्वी, आप, वरुण, अग्नि, आकाष, खम् और ऋच ये सप्त देव गण दस-दस देव गुणों का मुझमें गन्ध, रस, रूप, [ … ]

“अन्तर्रस साधना”

भावातीत ध्यान अनुगुणित तैंतीस रस देवताओं को अप्रत्यक्ष प्रभावित करता है। पर उसके परिणाम भी प्रभावशील हैं। अन्तर्रस साधना जिसे रसन भावातीत भी कहा जा सकता है सीधी लार उत्पादक [ … ]

यम-नियम कानून और अपराध

यम पांच हैं नियम पाच हैं। कानून ढेर से हैं। अपराध अनेक हैं। क्या इन तीनों मे कोई अन्तर्सम्बन्ध है ? इस पर गहन चिन्तन मनन करने की आवश्यकता है। [ … ]

“ससीम विज्ञान- असीम अध्यात्म”

विशेष ज्ञान का नाम विज्ञान है। बुद्धिमत्ता, ज्ञान, विज्ञान के समन्वय पर ऊँचाई-गहराई का अन्त्य छोर पाना अध्यात्म है। प्राकृतिक नियमों की खोज तथा विष्लेषण करना विज्ञान है। प्राकृतिक, सामाजिक, [ … ]